जज सुन्दरलाल की वापसी – ‘जॉली एलएलबी 3’ में सौरभ शुक्ला ने फिर लूटी महफ़िल

फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ ट्रेलर जितनी हल्की-फुल्की लग रही थी, पर्दे पर उतनी नहीं है। यह फिल्म एक तीखी और असरदार कहानी पेश करती है, जिसमें हास्य का तड़का भी है और कलाकारों के दमदार अभिनय का भी। इस बार फ्रेंचाइज़ी के दोनों जॉली – अक्षय कुमार और अरशद वारसी – अपनी देसी अदा के साथ लौटे हैं। दोनों वकीलों को नायक की तरह, मगर जमीन से जुड़े और इंसानियत भरे अंदाज़ में दिखाया गया है।
फिल्म के लेखक और निर्देशक सुभाष कपूर ने बिना समय गंवाए मुख्य विवाद को सामने रख दिया है। कहानी को उन्होंने इस तरह बुना है कि इसमें व्यंग्य भी है और संवेदनशीलता भी, लेकिन कहीं भी यह ज्यादा नाटकीय या उबाऊ नहीं लगती।
फिल्म की कहानी एक किसान की आत्महत्या और उसकी पत्नी जानकी (सीमा बिस्वास) द्वारा देश के सबसे बड़े उद्योगपति हरिभाई खेतान (गजराज राव) के खिलाफ दायर मुकदमे के इर्द-गिर्द घूमती है। खेतान का महत्वाकांक्षी ‘बीकानेर टू बॉस्टन’ प्रोजेक्ट जानकी के गांव और उसके लोगों को उजाड़ने पर टिका है। पिछले हिस्सों की तरह इस बार भी सुभाष कपूर ने एक वास्तविक घटना से प्रेरणा लेकर कहानी गढ़ी है।
अक्षय कुमार और अरशद वारसी दोनों ही अपने-अपने अंदाज़ में दर्शकों को बांधते हैं। अक्षय के तेज-तर्रार संवाद असर छोड़ते हैं, जबकि अरशद की हल्की-फुल्की कॉमेडी लंबे समय तक याद रहती है। दोनों के किरदारों में बदलाव – छोटे-मोटे वकीलों से लेकर ज़मीर और ईमानदारी से भरे इंसानों तक – सहज और असली लगता है।
फिल्म में असली शो-स्टॉपर जज सुन्दरलाल त्रिपाठी बने हैं, जिन्हें निभा रहे हैं सौरभ शुक्ला। इस बार उनका किरदार और भी गहराई लिए हुए है। तंज भरी बातों के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व में हल्की-सी रोमांटिक परत भी दिखाई देती है, जो फिल्म को और ऊंचाई देती है।
फिल्म में वही सब कुछ है, जो इस फ्रेंचाइज़ी को खास बनाता है – सत्ता पर तीखा व्यंग्य, कोर्टरूम के मजेदार पल, भावनात्मक मोनोलॉग और पैसे बनाम ईमानदारी की लड़ाई। फिर भी फिल्म दोहराव नहीं लगती। संवाद असरदार हैं, हास्य सही जगह पर काम करता है और भावनाएं बनावटी नहीं लगतीं।
हालांकि फिल्म में एक लंबा गाना और ऊंटों की रेस वाला सीन थोड़ा खटकता है। गजराज राव का किरदार भी और गहराई पा सकता था, लेकिन यह स्क्रिप्ट की कमी ज्यादा लगती है। इसके बावजूद फिल्म जोरदार असर छोड़ती है और दर्शकों को सही सवाल पूछने पर मजबूर करती है।
सुभाष कपूर ने एक बार फिर यह साबित किया है कि यह फ्रेंचाइज़ी अपनी असली पहचान नहीं खोई है। ‘जॉली एलएलबी 3’ मनोरंजन के साथ-साथ सिस्टम से सवाल भी पूछती है। अक्षय और अरशद की शानदार परफॉर्मेंस, और सौरभ शुक्ला की दमदार मौजूदगी इसे थिएटर में देखने लायक बनाती है।
यह भले ही सबसे परिष्कृत कोर्टरूम ड्रामा न हो, लेकिन यह दिखाती है कि यह फ्रेंचाइज़ी क्यों अब भी मायने रखती है। ‘जॉली एलएलबी 3’ हंसाती भी है, सोचने पर मजबूर भी करती है और तालियां भी बटोरती है।





