Gaganyaan Mission: ISRO ने सफलतापूर्वक पूरा किया दूसरा एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज, 10 अप्रैल 2026 को अपने महात्वाकांक्षी गगनयान मिशन की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) सफलतापूर्वक संपन्न किया।
क्या है IADT-02 और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस सफलता की घोषणा की। एयर ड्रॉप टेस्ट का मुख्य उद्देश्य गगनयान के ‘क्रू मॉड्यूल’ की सुरक्षित लैंडिंग प्रणाली का परीक्षण करना है।
इस परीक्षण के दौरान:
- क्रू मॉड्यूल को एक हेलीकॉप्टर (Chinook) के जरिए हवा में ले जाया गया।
- एक निश्चित ऊंचाई से इसे ड्रॉप किया गया ताकि इसके पैराशूट सिस्टम की कार्यक्षमता की जांच की जा सके।
- यह परीक्षण सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष से वापस लौटते समय भारतीय अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से समुद्र या जमीन पर लैंड कर सकें।
गगनयान मिशन: भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन
गगनयान मिशन के जरिए भारत पहली बार स्वदेशी तकनीक से मनुष्यों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। IADT-01 की सफलता के बाद, इस दूसरे परीक्षण (IADT-02) का सफल होना यह दर्शाता है कि मिशन का रिकवरी सिस्टम और पैराशूट तकनीक पूरी तरह से भरोसेमंद है। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह के जटिल परीक्षण मिशन की सुरक्षा प्रोटोकॉल को पुख्ता करते हैं। अब भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल होने के और करीब पहुंच गया है, जिनके पास स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता है।





