
नई दिल्ली: भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया युद्धविराम (सीज़फायर) का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में शांति कायम होगी, साथ ही वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता लौटेगी।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपने बयान में कहा कि भारत हमेशा से बातचीत, कूटनीति और तनाव कम करने का समर्थन करता रहा है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष की वजह से लोगों को भारी नुकसान हुआ है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
Statement on the recent development in West Asia ⬇️
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— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) April 8, 2026
भारत ने खास तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के महत्व पर जोर दिया, जो दुनिया भर में तेल सप्लाई का एक अहम रास्ता है। भारत ने कहा कि इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए।
यह युद्धविराम अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद सामने आया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखता है, तो यह समझौता लागू रहेगा। यह घोषणा अमेरिका की तय समय सीमा से ठीक पहले की गई।
वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर हमले रुकते हैं, तो ईरान भी अपनी जवाबी कार्रवाई बंद कर देगा। खबरों के मुताबिक, ईरान ने कुछ शर्तें भी रखी हैं, जिनमें अमेरिकी प्रतिबंध हटाना, जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी शामिल है।
करीब 39 दिन पहले तेहरान पर हुए हवाई हमलों के बाद यह तनाव बढ़ गया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ा।
अब इस युद्धविराम से उम्मीद की जा रही है कि हालात धीरे-धीरे सामान्य होंगे और वैश्विक बाजार में स्थिरता लौटेगी।





