विदेश

दुनिया में सबसे स्थिर रिश्तों में है भारत-रूस की दोस्ती: जयशंकर

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार को मॉस्को में कहा कि भारत और रूस के बीच का रिश्ता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया के सबसे स्थिर रिश्तों में से एक रहा है। इस मौके पर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी दोनों देशों के रिश्ते को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” बताया और कहा कि यह संबंध दोनों देशों के नेताओं के नेतृत्व में और मजबूत हुए हैं। जयशंकर मॉस्को पहुंचे, जहां उन्होंने रूस के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर डेनिस मांटुरोव के साथ व्यापार और आर्थिक मामलों पर बातचीत के बाद लावरोव से मुलाकात की।


जयशंकर ने कहा कि यह बैठक राजनीतिक रिश्तों और द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा का मौका है। उन्होंने कहा, “मैं राजनीति, व्यापार, निवेश, रक्षा, विज्ञान-तकनीक और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए उत्सुक हूं।” उन्होंने पिछले साल हुई 22वीं वार्षिक शिखर बैठक और कज़ान में हुई नेताओं की मुलाकातों का भी जिक्र किया। जयशंकर ने कहा कि इन बैठकों ने हमेशा दोनों देशों को आगे बढ़ने की दिशा दी है और साल के अंत में होने वाले अगले समिट की तैयारियां चल रही हैं।

जयशंकर ने कहा कि हाल में कई अहम मुलाकातें हुईं—एनएसए अजीत डोभाल, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी की रूस यात्राएं इसकी मिसाल हैं। जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया में भू-राजनीतिक बदलाव, व्यापार और अर्थव्यवस्था में नए हालात के बीच भारत-रूस रिश्तों को और मजबूत करने की जरूरत है।

रूस के विदेश मंत्री लावरोव ने जयशंकर का स्वागत करते हुए कहा, “हम अपने रिश्तों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप कहते हैं। यह हमारे नेताओं द्वारा तय किया गया है और हम इसे पूरी तरह मजबूत करने की उम्मीद करते हैं।” लावरोव ने बदलते वैश्विक हालात में बहुध्रुवीय दुनिया की बात की और कहा कि SCO, BRICS और G20 जैसे मंचों का महत्व बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सहयोग और समझौते का एक अहम प्लेटफॉर्म बना हुआ है।


यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका ने भारत पर टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया है और रूस से तेल खरीद पर भी नई पाबंदियां लगाई हैं। इससे भारत में आर्थिक असर और सेकेंडरी सैंक्शन को लेकर चिंता है। इसी संदर्भ में जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस को आपसी सहयोग बढ़ाना और विविधता लाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, “हमें ज्यादा करना होगा और अलग तरीके से करना होगा।” जयशंकर ने रूस के डिप्टी पीएम से कहा कि रूसी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ ज्यादा सक्रियता से काम करना चाहिए और पुराने तरीकों में अटके नहीं रहना चाहिए।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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