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समुद्री ताकत में बड़ा उछाल: विशाखापत्तनम में LCT सुविधा से भारत बनेगा और आत्मनिर्भर

विशाखापत्तनम, 4 अप्रैल 2026: भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और समुद्री शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार (3 अप्रैल 2026) को विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL) में एक अत्याधुनिक लार्ज कैविटेशन टनल (LCT) सुविधा की आधारशिला रखी।

क्या है लार्ज कैविटेशन टनल (LCT)?

यह टनल एक ऐसी आधुनिक प्रयोगशाला सुविधा है जो नौसेना के बड़े प्लेटफार्मों जैसे विमान वाहक पोत (Aircraft Carriers), डिस्ट्रॉयर्स और पनडुब्बियों (Submarines) के हाइड्रोडायनामिक डिजाइन के सटीक सत्यापन के लिए बनाई गई है। यह सुविधा दुनिया की चुनिंदा बड़ी सुरंगों में से एक है, जो भारत को वैश्विक रक्षा अनुसंधान मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगी।

प्रमुख विशेषताएं और लाभ

1. अनूठा वैश्विक एसेट: यह टनल एक ही सेटअप के भीतर पनडुब्बियों के लिए ‘क्लोज्ड-लूप सिमुलेशन’ और जहाजों के लिए ‘फ्री सरफेस सिमुलेशन’ करने में सक्षम है।
2. आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम: अब भारतीय नौसेना के जहाजों और प्रोपेलर (Propeller) के परीक्षण के लिए विदेशी प्रयोगशालाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
3. बेहतर डिजाइन: यह सुविधा पानी के भीतर जहाजों की गति, शोर और ईंधन दक्षता के विश्लेषण में मदद करेगी, जिससे हमारे नौसैनिक बेड़े की गुप्त क्षमता (Stealth capability) में सुधार होगा।

DRDO और NSTL का योगदान

यह परियोजना रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि यह तकनीक भविष्य के युद्धपोतों के स्वदेशी निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी।

विशाखापत्तनम में इस सुविधा का निर्माण न केवल भारत की इंजीनियरिंग कौशल को दर्शाता है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ को भी और अधिक सशक्त बनाता है।

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