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भारत बना रहा है अपना स्पेस स्टेशन, पहला मॉड्यूल 2028 में होगा लॉन्च: इसरो प्रमुख वी. नारायणन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी. नारायणन ने शुक्रवार को कहा कि भारत को आने वाले तीन वर्षों में अंतरिक्ष में मौजूद अपने उपग्रहों की संख्या को तीन गुना बढ़ाना होगा। इस समय अंतरिक्ष में भारत के 55 उपग्रह सक्रिय हैं जो देशवासियों को विभिन्न सेवाएं दे रहे हैं। कोलकाता में ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम – उपलब्धियां, चुनौतियां और भविष्य की दिशा’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए नारायणन ने कहा, “देश में उपग्रहों की मांग बहुत अधिक है, इसलिए हमें नए उपग्रह बनाने होंगे और हम इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।” उन्होंने भरोसा जताया कि वर्ष 2040 तक भारत अंतरिक्ष तकनीक, इसके अनुप्रयोग और बुनियादी ढांचे के मामले में दुनिया की किसी भी बड़ी अंतरिक्ष ताकत के बराबर होगा।

इसरो प्रमुख ने जानकारी दी कि इस साल संगठन कुल 12 लॉन्च व्हीकल मिशन की योजना बना चुका है। इनमें अगला बड़ा मिशन 30 जुलाई को होगा, जब भारत और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया ‘निसार’ (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) सैटेलाइट जीएसएलवी एफ16 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। नारायणन ने बताया कि भारत अपने खुद के अंतरिक्ष स्टेशन पर भी तेजी से काम कर रहा है। इसका पहला मॉड्यूल 2028 में लॉन्च किया जाएगा और 2035 तक यह स्टेशन पूरी तरह तैयार होगा। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता के बाद जापान ने भारत के साथ साझेदारी की है। अब इसरो और जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जैक्सा मिलकर चंद्रयान-5 या लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन (LUPEX) मिशन पर काम कर रहे हैं।

चंद्रयान-5 के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें 6,600 किलोग्राम वजनी लैंडर भेजा जाएगा, जबकि चंद्रयान-3 का लैंडर 1,600 किलोग्राम का था। “हम इस पर काम कर रहे हैं और अगले दो वर्षों में इस मिशन को लेकर बड़ी खबर सामने आएगी,” उन्होंने कहा। इसरो प्रमुख ने यह भी बताया कि भारतीय रॉकेट से अगले तीन महीनों में अमेरिका का 6,500 किलोग्राम वजनी संचार उपग्रह लॉन्च किया जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्चपैड के निर्माण के लिए लगभग 4,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन को लेकर नारायणन ने बताया कि 2027 की पहली तिमाही में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। इसरो अब तक 34 देशों के 433 उपग्रह लॉन्च कर चुका है, जिनके पास खुद की अंतरिक्ष तकनीक नहीं है। पिछले दस वर्षों में इसरो ने कुल 518 उपग्रहों को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजा है। इस उपलब्धि के लिए इसरो प्रमुख वी. नारायणन को प्रतिष्ठित जी.पी. बिड़ला स्मारक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब तकनीक, व्यावसायिकता और वैश्विक साझेदारी के तीन स्तंभों पर आगे बढ़ रहा है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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