India-EU FTA Deal: किस सामान पर टैक्स खत्म, किस पर कितनी राहत? पूरी लिस्ट

करीब 18 वर्षों तक चली लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच आखिरकार मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) हो गया है। 27 जनवरी को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में इस ऐतिहासिक डील को अंतिम रूप दिया गया। इस मौके पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के राष्ट्रपति एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और भारतीय प्रतिनिधियों के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दोनों यूरोपीय नेताओं से मुलाकात की और इस समझौते को भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बताया।
इस एफटीए के साथ ही भारत और यूरोपीय यूनियन के 27 सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश के रास्ते और आसान हो जाएंगे। समझौते के तहत यूरोप से भारत आने वाले अधिकांश उत्पादों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती या पूरी तरह समाप्ति की गई है, जिससे भारतीय बाजार में कई सामान सस्ते होने की उम्मीद है।
India–EU FTA: कौन-कौन सा सामान होगा सस्ता?
केमिकल्स
यूरोपीय यूनियन से आने वाले लगभग सभी केमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म
इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत घटेगी
मेडिकल, सर्जिकल और ऑप्टिकल उपकरण
90% मेडिकल, सर्जिकल और ऑप्टिकल उपकरण टैक्स-फ्री
MRI, डायग्नोस्टिक मशीनें और इलाज से जुड़ी आधुनिक तकनीक सस्ती होंगी
खाने-पीने का सामान
ऑलिव ऑयल – आयात शुल्क पूरी तरह खत्म
मार्जरीन – टैक्स खत्म
वेजिटेबल ऑयल – टैक्स खत्म
आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर
शराब और पेय पदार्थ
यूरोपीय बीयर: टैक्स 110% से घटकर 50%
स्पिरिट्स (व्हिस्की, वोडका आदि): टैक्स घटकर 40%
वाइन: 20% से 30% तक टैरिफ में कटौती
विदेशी शराब की कीमतों में बड़ी गिरावट संभव
लग्जरी कारें (ऑटो सेक्टर)
BMW, Volkswagen जैसी यूरोपीय लग्जरी कारें
आयात टैक्स 40% से घटकर 10% तक (चरणबद्ध तरीके से)
प्रीमियम कारें भारतीय ग्राहकों के लिए ज्यादा किफायती होंगी
इस एफटीए से भारत को भी बड़ा फायदा होगा। समझौते के तहत यूरोप भेजे जाने वाले लगभग 97 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर टैरिफ खत्म हो जाएगा। इससे भारत को हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर की सीमा शुल्क बचत होने का अनुमान है। आईटी और सर्विस सेक्टर के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी और भारत में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। फिलहाल करीब 6,000 यूरोपीय कंपनियां भारत में मौजूद हैं, जिनकी संख्या आने वाले वर्षों में और बढ़ने की उम्मीद है।
यह डील ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बनी हुई है और कई देश वैकल्पिक बाजारों की तलाश में हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत-ईयू एफटीए को दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। यूरोपीय यूनियन का लक्ष्य है कि 2032 तक भारत के साथ 96 प्रतिशत सामानों पर टैरिफ खत्म कर दिया जाए, जिससे उसे सालाना करीब 4 बिलियन डॉलर की बचत हो सकेगी।
कुल मिलाकर, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट न केवल व्यापार को नई गति देगा, बल्कि निवेश, रोजगार और आर्थिक सहयोग के लिहाज से भी दोनों पक्षों के लिए एक अहम मील का पत्थर साबित होगा।





