भारत के लिए खतरे की घंटी: फारस की खाड़ी में फंसे 28 जहाज, ऊर्जा सप्लाई पर असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी चिंता की खबर सामने आई है। कम से कम 28 जहाज, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति लेकर आ रहे थे, फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। यह रुकावट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में बढ़ते तनाव के कारण हुई है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है।
भारतीय जहाजों की संख्या ज्यादा
फंसे हुए जहाजों में 18 भारत-ध्वज वाले जहाज शामिल हैं, जो कच्चा तेल, LPG और LNG लेकर कर आ रहे हैं। इसके अलावा 10 विदेशी जहाज भी हैं, जो भारतीय बंदरगाहों की ओर जा रहे थे। इन जहाजों में कुल 485 भारतीय नाविक सवार हैं।
सरकार ने बढ़ाई सतर्कता
पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इन जहाजों में एलपीजी कैरियर, कच्चे तेल के टैंकर और एलएनजी जहाज शामिल हैं। सरकार इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने को प्राथमिकता दे रही है, खासकर ऐसे समय में जब इस क्षेत्र में बीमा प्रीमियम भी तेजी से बढ़ गया है।
▪️वर्तमान में 18 भारतीय जहाज़, जिनमें 485 नाविक सवार हैं, फारस की खाड़ी में संचालन कर रहे हैं और सभी सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में किसी भी प्रकार की समुद्री घटना की सूचना नहीं मिली है।
▪️दो #LPG वाहक जहाज़ BWTYR और BW ELM कुल 94,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य… pic.twitter.com/H8m7cTutgx
— PIB in Uttar Pradesh (@PibLucknow) March 30, 2026
कुछ जहाज निकलने में सफल
हालांकि स्थिति पूरी तरह से ठप नहीं है। हाल के दिनों में 8 भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पार करने में सफल रहे हैं। इनमें BW TYR और BW ELM जैसे एलपीजी कैरियर शामिल हैं, जो करीब 94,000 टन ईंधन लेकर भारत पहुंचने वाले हैं।
ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर संभव
इस रुकावट का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत का लगभग
- 40% कच्चा तेल
- 50% से ज्यादा एलएनजी
- 90% एलपीजी
इसी मार्ग से होकर आता है। ऐसे में किसी भी तरह की बाधा देश की सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है।
स्थिति पर सरकार की नजर
सरकार ने कहा है कि वह जहाजों की आवाजाही और नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है। पिछले 72 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज के साथ कोई हादसा नहीं हुआ है। फिलहाल सरकार का फोकस जहाजों को सुरक्षित निकालने और सप्लाई को स्थिर बनाए रखने पर है।





