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लंदन में भारत ने दी पाक प्रायोजित आतंकवाद पर दो टूक, ब्रिटेन ने जताया समर्थन

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और झूठे प्रचार के खिलाफ भारत की वैश्विक कूटनीतिक मुहिम तेज हो गई है। भारत के सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों 33 देशों की राजधानियों का दौरा कर रहे हैं। इन शिष्टमंडलों में 51 सांसदों के साथ कई पूर्व केंद्रीय मंत्री, राजनयिक और वरिष्ठ नौकरशाह भी शामिल हैं, जो एकजुट होकर ‘टीम इंडिया’ की तरह भारत का पक्ष मजबूती से रख रहे हैं।

इन प्रतिनिधिमंडलों का मकसद है पाकिस्तान के आतंकवाद के पनाहगाह और उसकी सरकार की नीतियों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब करना। भारत का पक्ष रखने के लिए ये प्रतिनिधिमंडल अल्जीरिया, डेनमार्क, ब्रिटेन, इथियोपिया, फ्रांस, इटली, ग्रीस, बहरीन, कतर, रूस, जापान और यूएई जैसे देशों का दौरा कर चुके हैं। इन देशों में भारत की आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को स्पष्ट रूप से बताया गया है।

लाइबेरिया में यात्रा समाप्त करने के बाद भाजपा सांसद अतुल गर्ग ने बताया कि उन्हें जिन देशों का दौरा करने का अवसर मिला, वहां भारत को पूरा समर्थन मिला। उन्होंने कहा, “हमने वहां के लोगों को पाकिस्तान की स्थिति और आतंकवाद के समर्थन की हकीकत बताई। अफ्रीकी देशों से हमें जबरदस्त समर्थन मिला। वहां के लोग भारत और प्रधानमंत्री मोदी से गहरा लगाव रखते हैं। सभी देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की।”

शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, जो चार देशों के दौरे वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे, ने कहा, “यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमें प्रधानमंत्री मोदी ने यह ज़िम्मेदारी दी। 13 दिनों की इस यात्रा में हमें अंतरराष्ट्रीय नेताओं से बातचीत का अवसर मिला, और उनमें भारत के प्रति सम्मान और पीएम मोदी का प्रभाव साफ दिखाई दिया। जिन देशों का दौरा किया, उन्होंने भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को समझा और समर्थन भी दिया।”

लंदन में भारतीय उच्चायोग ने बताया कि भारत के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने यूके सरकार के मंत्रियों, सांसदों, पार्टी नेताओं, थिंक टैंक और भारत मैत्री संगठनों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत-यूके सहयोग, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ रणनीतिक साझेदारी को लेकर गहन चर्चा हुई।

बैठकों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत की आतंकवाद विरोधी नीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में बताया गया। इस अभियान को वैश्विक सुरक्षा, न्याय और साझा रणनीतिक लक्ष्यों की दिशा में एक ठोस कदम के रूप में स्वीकार किया गया। यूके स्थित थिंक टैंकों के साथ हुई चर्चा में ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव और आतंक के खिलाफ भारत की नई नीति को विस्तार से बताया गया।

मंगलवार से प्रतिनिधिमंडलों की भारत वापसी शुरू हो गई है। लौटने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ-साथ सभी सांसद, राजनयिक और प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और उन्हें यात्रा के अनुभवों और हासिल समर्थन की जानकारी देंगे।

भारत की यह कूटनीतिक पहल न सिर्फ पाकिस्तान के दुष्प्रचार का जवाब है, बल्कि यह वैश्विक मंचों पर भारत की सशक्त उपस्थिति का भी प्रमाण है। ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले के बाद भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति स्पष्ट, निर्णायक और वैश्विक सहयोग की दिशा में केंद्रित है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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