राजनीति

पीएम का संबोधन कैसे बना ग्रैंड स्ट्रैटेजी का मास्टरस्ट्रोक: सौरभ शुक्ला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा में दिए अपने जोरदार संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारत की रणनीतिक क्षमता का परिचय देते हुए न केवल पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक नीति को स्पष्ट किया, बल्कि विपक्ष को भी करारा जवाब दिया। ‘न्यूज मोबाइल’ के फाउंडर और वरिष्ठ पत्रकार सौरभ शुक्ला ने पीएम मोदी के इस भाषण को “ग्रैंड स्ट्रैटेजी की मास्टरक्लास” करार दिया। उनके अनुसार, पीएम मोदी ने संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को देश के साथ खड़े होने का एक बड़ा मौका दिया था, लेकिन वह अवसर गंवा दिया गया।

प्रधानमंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को आतंक के खिलाफ भारत की एक निर्णायक कार्रवाई बताया और इसे भारत की रणनीतिक संप्रभुता का प्रतीक कहा। सौरभ शुक्ला के मुताबिक, “पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि आज का भारत अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह संदेश न केवल पाकिस्तान को, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दिया।”

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति के साथ हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए यह भी बताया कि कैसे उन्होंने वैश्विक नेताओं के सामने भारत का पक्ष मजबूती से रखा था। उन्होंने कहा, “जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बातचीत की, तो मैंने उन्हें दो टूक कहा कि भारत की सुरक्षा सर्वोपरि है, और हम अपनी सीमाओं की रक्षा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”

इस पर सौरभ शुक्ला का कहना है कि, “प्रधानमंत्री ने जब संसद में इस बातचीत का जिक्र किया, तो वो सिर्फ भारत के विपक्ष नहीं, बल्कि अमेरिका और अन्य विश्व शक्तियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश था – कि भारत अब किसी दबाव में नहीं आने वाला।” प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के दौरान कांग्रेस पार्टी की पिछली सरकारों की विदेश नीति की नाकामियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 26/11 जैसे आतंकी हमले के बाद भी उस समय की सरकार पाकिस्तान से बात करने को तैयार थी और कैसे विदेशी दबाव में झुककर देश के खिलाफ हुई साजिशों पर प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

सौरभ शुक्ला कहते हैं, “प्रधानमंत्री ने विपक्ष को सिर्फ जवाब नहीं दिया, बल्कि आईना दिखाया। उन्होंने कांग्रेस की रणनीतिक चूकों और पाकिस्तान के प्रति नरम रुख को उजागर किया। यह भाषण वास्तव में विपक्ष के लिए एक चेतावनी भी था कि अब देश की जनता पुराने रवैये को नहीं भूलेगी।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज का भाषण केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि यह भारत की वैश्विक रणनीति का एक स्पष्ट और मजबूत बयान था। उन्होंने जिस तरीके से संसद में अपनी बात रखी, वह न सिर्फ भारत की ताकत का प्रतीक था, बल्कि आने वाले समय में विपक्ष के लिए एक गहन आत्ममंथन का विषय भी है।

सौरभ शुक्ला के मुताबिक, “यह भाषण उस भारत का प्रतीक है जो अब पीछे नहीं हटता, जो आतंकवाद का जवाब आतंक के घर में जाकर देता है, और जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात मजबूती से रखने से नहीं डरता।”

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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