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भारत में मॉनसून की भविष्यवाणी कैसे की जाती है? जानिए पूरी प्रक्रिया

भारत में मॉनसून केवल एक मौसमीय बदलाव नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों, शहरों, उद्योगों और सरकारों के लिए जीवनरेखा है। यही कारण है कि हर साल मॉनसून के समय देशभर की नजरें मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर टिकी रहती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस बारिश की भविष्यवाणी कैसे होती है? कौन करता है? किस तकनीक से? आइए जानते हैं पूरी प्रक्रिया

1.भारत में मॉनसून की भविष्यवाणी कौन करता है?

भारत में मॉनसून से संबंधित पूर्वानुमान और अध्ययन की जिम्मेदारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी India Meteorological Department (IMD) की होती है। यह विभाग पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के अधीन कार्य करता है। IMD देशभर में फैले सैकड़ों वेदर स्टेशनों, रडार नेटवर्क, उपग्रहों और समुद्री उपकरणों के जरिए डेटा इकट्ठा करता है और मॉनसून से संबंधित वैज्ञानिक विश्लेषण करता है। IMD की आधिकारिक वेबसाइट https://mausam.imd.gov.in पर प्रतिदिन मॉनसून बुलेटिन, चेतावनियां और विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती हैं।

2.मॉनसून पूर्वानुमान के लिए कौन-कौन से मॉडल उपयोग में आते हैं?

भारत में दो प्रमुख वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रयोग होता है— पहला है स्टैटिस्टिकल मॉडल, और दूसरा है डायनामिकल मॉडल। स्टैटिस्टिकल मॉडल पारंपरिक और ऐतिहासिक आंकड़ों पर आधारित होता है। इसमें समुद्री सतह के तापमान, वायुमंडलीय दबाव, हवा की दिशा, अफ्रीका-भारत तापमान भिन्नता और ENSO (El Niño–Southern Oscillation) जैसी घटनाओं के आधार पर गणनाएं की जाती हैं।

डायनामिकल मॉडल अत्याधुनिक कंप्यूटर-संचालित मॉडल है जिसमें पृथ्वी, समुद्र, वायुमंडल और अन्य प्राकृतिक तत्वों के बीच होने वाली क्रियाओं को सुपरकंप्यूटर की सहायता से सिमुलेट किया जाता है। भारत सरकार के पास इसके लिए “Pratyush” और “Mihir” जैसे सुपरकंप्यूटर हैं, जिनका संचालन पुणे स्थित IITM (Indian Institute of Tropical Meteorology) द्वारा किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए IITM की आधिकारिक वेबसाइट https://www.tropmet.res.in पर जा सकते हैं।

3.डेटा कैसे इकट्ठा किया जाता है और भविष्यवाणी कैसे बनाई जाती है?

IMD देशभर में फैले 700 से अधिक वेदर स्टेशनों, डॉप्लर रडार नेटवर्क, INSAT उपग्रहों, और समुद्री बुआय (Buoys) की सहायता से तापमान, वर्षा, आर्द्रता, हवा की गति व दिशा, समुद्री सतह का तापमान जैसी जानकारियां इकट्ठा करता है। ये डेटा फिर पुणे स्थित राष्ट्रीय जलवायु केंद्र (National Climate Centre) और अन्य अनुसंधान संस्थानों द्वारा प्रोसेस किए जाते हैं।

इन सूचनाओं के आधार पर अप्रैल में पहला मॉनसून पूर्वानुमान (First Long Range Forecast) जारी किया जाता है, जिसमें बताया जाता है कि मॉनसून सामान्य रहेगा या नहीं। इसके बाद मई और जून में अधिक विस्तृत और क्षेत्रवार अपडेटेड पूर्वानुमान (Updated Forecast) जारी किए जाते हैं। ये सारी जानकारियां IMD की वेबसाइट पर मॉनसून सेक्शन में उपलब्ध होती हैं: https://mausam.imd.gov.in/

4.एल-नीनो और ला-नीना की भूमिका क्या होती है?

मॉनसून की भविष्यवाणी करते समय एक महत्वपूर्ण वैश्विक कारक होता है El Niño और La Niña। यह दोनों घटनाएं प्रशांत महासागर के समुद्री सतह तापमान में बदलाव से जुड़ी होती हैं। El Niño के दौरान समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे भारत में मानसूनी वर्षा कम हो सकती है। वहीं, La Niña के दौरान समुद्र ठंडा हो जाता है और यह सामान्य या अधिक वर्षा को बढ़ावा देता है।

इन घटनाओं की निगरानी और विश्लेषण भी भारत मौसम विज्ञान विभाग और IITM पुणे द्वारा किया जाता है। ENSO स्थिति पर ताज़ा जानकारी NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहती है: https://www.ncei.noaa.gov/access/monitoring/enso/

5.मॉनसून बुलेटिन और ट्रैकिंग कैसे होती है?

मॉनसून के आगमन के बाद IMD प्रतिदिन एक मॉनसून बुलेटिन जारी करता है जिसमें मॉनसून की प्रगति, वर्षा की मात्रा, अलर्ट और चेतावनियों की जानकारी दी जाती है। IMD की वेबसाइट और “मौसम” ऐप के माध्यम से आम जनता और किसान इन बुलेटिनों को पढ़ सकते हैं। इसके अलावा राज्य स्तरीय मौसम केंद्र भी अपने-अपने क्षेत्रों के लिए अलग से अलर्ट जारी करते हैं। https://mausam.imd.gov.in/responsive/monsooninformation.php

6.यह प्रक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां लगभग 55% खेती बारिश पर निर्भर करती है। मॉनसून की सटीक भविष्यवाणी से किसान खेती की योजना बना सकते हैं, सरकार राहत योजना बना सकती है, और बाढ़ या सूखे जैसी आपदाओं से निपटने में समय रहते उपाय किए जा सकते हैं। यही कारण है कि हर साल मौसम वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और नीति निर्माता मिलकर मॉनसून पूर्वानुमान को और अधिक सटीक और उपयोगी बनाने की दिशा में काम करते हैं।

भारत में मॉनसून की भविष्यवाणी एक अत्यंत वैज्ञानिक, जटिल और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें मौसम विज्ञान, समुद्र विज्ञान और गणितीय मॉडल का समन्वय होता है। IMD और इससे जुड़े संस्थान हर साल इस प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान और तकनीकी विकास में लगे हुए हैं। किसानों, आम जनता और नीति निर्माताओं के लिए यह जानकारी न केवल मौसम जानने का माध्यम है, बल्कि जीवन, फसल और भविष्य की योजनाओं का आधार भी बन चुकी है।

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