मणिपुर की सुरक्षा स्थिति पर गृह मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक, राष्ट्रपति शासन के बाद पहली समीक्षा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए गृह मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद पहली बार हुई, जिसमें मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, राज्य सरकार, सेना और अर्धसैनिक बलों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के कारण अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच, मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।
वर्तमान में विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है, जबकि उसका कार्यकाल 2027 तक है। यह बैठक राज्यपाल द्वारा 20 फरवरी को दिए गए उस अल्टीमेटम के बाद आयोजित की गई, जिसमें अवैध व लूटे गए हथियारों को जमा करने का निर्देश दिया गया था। सात दिनों की अवधि में 300 से अधिक हथियार जनता द्वारा सौंपे गए, जिनमें से 246 आग्नेयास्त्र मुख्य रूप से मेइती चरमपंथी समूह अरम्बाई टेंगोल द्वारा जमा किए गए। राज्यपाल भल्ला ने जनता की मांग को ध्यान में रखते हुए हथियार सरेंडर करने की समय सीमा छह मार्च तक बढ़ा दी है।
कांग्रेस ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने को लेकर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस की मणिपुर इकाई के उपाध्यक्ष हरेश्वर गोस्वामी ने कहा कि राज्य में भाजपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त होने के बावजूद राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जो सरकार की अक्षमता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय केंद्र और राज्य में भाजपा की विफलता का परिणाम है।
सुरक्षा बलों ने मणिपुर के कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में अभियान चलाकर एक उग्रवादी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कांगपोकपी के बिंपाराव क्षेत्र से गिरफ्तार चार लोग प्रतिबंधित ‘कुकी नेशनल फ्रंट (पी)’ संगठन से जुड़े थे, जबकि भारत-म्यांमार सीमा पर कामजोंग जिले के कुल्तुह गांव में ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ के एक सक्रिय सदस्य को हथियारों के साथ पकड़ा गया।





