देश में आज मनाई जा रही है गुरु पूर्णिमा, यहां जानें क्यों मनाते हैं यह पर्व और क्या है इसका धार्मिक महत्व

देश में आज यानी 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा और वेद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह त्योहार हर साल के आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन, शिष्य अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनके ज्ञान और मार्गदर्शन के लिए उनका सम्मान करते हैं।
जानें तिथि, पंचांग और पूजन मुहूर्त
- तिथि आरंभ: 10 जुलाई 2025, रात्रि 1:36 बजे
- तिथि समाप्ति: 11 जुलाई 2025, रात्रि 2:06 बजे
- उदया तिथि अनुसार व्रत व पूजन: 10 जुलाई 2025 (गुरुवार)
- पर्व का नाम: गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा)
- पर्व की मान्यता: महर्षि वेदव्यास की जयंती
क्यों मानते हैं गुरु पूर्णिमा?
मान्यता है कि लगभग 3000 ई.पूर्व पहले आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के दिन महाभारत के रचयिता वेद व्यास का जन्म हुआ था। इसीलिए वेद व्यास जी के सम्मान में हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का दिन बनाया जाता है। इसके अलावा, गुरु पूर्णिमा को भगवान कृष्ण ने अपने गुरु ऋषि शांडिल्य को ज्ञान प्रदान करने के लिए चुना था। इसी दिन, भगवान बुद्ध ने भी अपने पहले पांच शिष्यों को उपदेश दिया था।
कैसे मानते हैं गुरु पूर्णिमा ?
गुरु पूर्णिमा के दिन लोग अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए उनके चरणों में स्पर्श करते हैं, उन्हें मिठाई और फूल भेंट करते हैं, और उनका आशीर्वाद लेते हैं। गुरु मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कई जगहों पर, गुरु शिष्य परंपरा को दर्शाने वाले नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग इस दिन दान-पुण्य भी करते हैं। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि गुरु पूर्णिमा पर दान-पुण्य का बहुत महत्व होता है।





