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गुजरात में गोबर से बनेगा ईंधन, ₹60 करोड़ से बनेंगे बायो-CNG प्लांट, गांवों की बदलेगी तस्वीर

गुजरात सरकार ने ऑर्गेनिक वेस्ट, खासकर गोबर को बायोगैस ईंधन में बदलने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने करीब ₹60 करोड़ की राशि से नए बायो-CNG प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

क्या है सरकार की योजना

मुख्यमंत्री Bhupendra Patel के नेतृत्व में इस योजना का उद्देश्य डेयरी सेक्टर को क्लीन एनर्जी हब में बदलना और गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से करीब 10 बायो-CNG प्लांट लगाए जाएंगे।

कैसे काम करता है बायो-CNG प्लांट

बायो-CNG प्लांट में गोबर, कृषि अवशेष और खाद्य अपशिष्ट को प्रोसेस कर शुद्ध कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाती है, जिसका इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री में ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

बनास मॉडल बना उदाहरण

Banaskantha का बनास बायो-CNG प्लांट इस दिशा में एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। यह प्लांट रोजाना करीब 40 मीट्रिक टन गोबर प्रोसेस करता है और पिछले छह वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इस मॉडल को अब देश के करीब 15 राज्य अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

किसानों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ

इस योजना से 20-25 गांवों के पशुपालक किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। किसानों से गोबर ₹1 प्रति किलो के हिसाब से खरीदा जाता है, जिससे उनकी आय में इजाफा हो रहा है। करीब 400-450 परिवार इस मॉडल से जुड़े हैं।

रोजगार और कमाई के नए अवसर

प्लांट से रोजाना करीब 1,800 किलो बायो-CNG तैयार होती है, जिसे बाजार में करीब ₹75 प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है। इसके साथ ही ऑर्गेनिक खाद का भी उत्पादन होता है, जिससे रोजाना 3 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई संभव है।

पर्यावरण को भी होगा फायदा

यह मॉडल हर साल करीब 6,750 टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करता है। यह पहल Narendra Modi के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और हरित ऊर्जा विजन को भी आगे बढ़ाती है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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