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संविधान दिवस पर सेंट्रल हॉल में भव्य समारोह, राष्ट्रपति-PM मोदी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल

75वें संविधान दिवस के मौके पर पुराने संसद भवन के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। सभी ने संविधान निर्माताओं के योगदान को याद किया और संविधान को राष्ट्र की प्रेरणा बताया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर राष्ट्रवादी सोच अपनाने का मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर 1949 को इसी सेंट्रल हॉल में संविधान का प्रारूप तैयार हुआ और इसी दिन भारत ने इसे अंगीकार किया। राष्ट्रपति ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका को विशेष रूप से याद किया, जो संविधान निर्माण के प्रमुख स्तंभों में से रहे।

उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता चाहते थे कि हर नागरिक के व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाने को देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। राष्ट्रपति मुर्मू ने अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को ‘राष्ट्र को राजनीतिक बाधा से मुक्ति’ दिलाने वाला कदम बताया, वहीं महिला नेतृत्व वाले विकास मॉडल को राष्ट्र के भविष्य की बड़ी ताकत करार दिया।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव शुरू किया गया है। उन्होंने तीन तलाक पर रोक को महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। जीएसटी लागू होने को उन्होंने देश के आर्थिक एकीकरण का महत्वपूर्ण अध्याय कहा।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने संविधान के नौ भाषाओं—मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया—में अनुवादित संस्करण भी जारी किए। संविधान दिवस 26 नवंबर 1949 को हमारे संविधान को आधिकारिक रूप से अपनाने की याद में मनाया जाता है। 2015 में केंद्र सरकार ने इस दिन को हर साल ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर नागरिकों से अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने की अपील की। वहीं उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि संविधान का निर्माण स्वतंत्रता संग्राम के महान नेताओं के सामूहिक ज्ञान और त्याग का परिणाम है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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