विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले हफ्ते चीन दौरे पर, एससीओ बैठक में होंगे शामिल

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले हफ्ते चीन के तिआनजिन शहर में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में शामिल होने के लिए चीन यात्रा पर जाएंगे। यह बैठक 15 जुलाई को होगी। इस बात की जानकारी चीनी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को दी। चीनी विदेश मंत्रालय ने बताया कि एससीओ बैठक में हिस्सा लेने के साथ-साथ जयशंकर चीन की आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा पर भी रहेंगे। इस दौरान वह कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
एससीओ में भारत, चीन, रूस, ईरान, पाकिस्तान, बेलारूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। इस बैठक में सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री और संगठन के स्थायी निकायों के प्रमुख हिस्सा लेंगे। चर्चा का फोकस क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने पर रहेगा।
खबरों के मुताबिक, जयशंकर 13 जुलाई को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से भी मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह जयशंकर की पूर्वी लद्दाख में 2020 की झड़पों के बाद पहली चीन यात्रा है। गौरतलब है कि हाल ही में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी चीन का दौरा कर चुके हैं। ऐसे में जयशंकर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सामान्य रिश्ते बहाल करने की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है।
जयशंकर की इस यात्रा के दौरान भारत-चीन सीमा विवाद, रेयर अर्थ मेटल्स के निर्यात पर चीनी रोक, और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। सूत्रों की मानें तो इसी महीने चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत भी आ सकते हैं। वह एनएसए अजीत डोभाल से ‘स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता’ के तहत सीमा विवाद पर बातचीत करेंगे। अब तक इस प्रक्रिया के तहत भारत और चीन के बीच 23 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।
भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात 26 जून को हुई थी, जिसमें सीमा पर शांति बनाए रखने और विश्वास बहाली के उपायों पर चर्चा हुई थी। याद दिला दें कि 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव आ गया था। हालांकि, अक्टूबर 2023 में रूस के कजान शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने बातचीत की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी।





