इंदौर में दूषित पानी पीने से 5 लोगों की मौत, 1000 से ज्यादा लोग बीमार

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि 1000 से अधिक लोग बीमार पड़ गए हैं। यह मामला भगीरथपुरा इलाके का है, जहां सरकारी पाइपलाइन से सप्लाई किए जा रहे पानी के दूषित होने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बीमार पड़ने वाले लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) माधव प्रसाद हस्सानी ने बताया कि 24 दिसंबर से अब तक भगीरथपुरा क्षेत्र के कई लोग बीमार होकर सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। फिलहाल 111 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 1000 से अधिक लोगों को हल्के लक्षणों के बाद प्राथमिक इलाज देकर घर भेजा गया है।
सीएमएचओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अब तक 2700 घरों में रहने वाले करीब 12 हजार लोगों का सर्वे किया है, जिसमें 1000 से ज्यादा लोगों में बीमारी के लक्षण पाए गए। इलाके में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं और एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है।
पांच लोगों की मौत के बारे में सीएमएचओ ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि सभी मौतें दूषित पानी के कारण ही हुई हैं। मृतकों में कुछ बुजुर्ग थे और एक व्यक्ति पहले से गंभीर बीमारी से पीड़ित था। सभी शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है, जिससे मौत के कारणों की पुष्टि करना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें कई हफ्तों से नर्मदा नदी से सप्लाई किए जा रहे पानी में गंदगी और बदबू की शिकायत थी, जिसकी सूचना नगर निगम को दी गई थी।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अस्पतालों का दौरा किया और अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भगीरथपुरा से आने वाले मरीजों का इलाज सभी निजी अस्पतालों में मुफ्त किया जाएगा और उसका खर्च सरकार उठाएगी। साथ ही, इलाके से 70 से ज्यादा पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव ने बताया कि जांच के दौरान मुख्य पाइपलाइन में एक जगह रिसाव पाया गया, जिसके पास एक शौचालय स्थित था। शौचालय को बंद कर मरम्मत कर दी गई है। अन्य जगहों पर भी पाइपलाइन की जांच और मरम्मत का काम जारी है। नगर निगम ने फिलहाल इलाके में पानी की सप्लाई बंद कर दी है और टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। लोगों को सलाह दी गई है कि जांच पूरी होने तक नल के पानी का उपयोग पीने के लिए न करें।
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि इससे पहले भी इस इलाके से गंदे पानी की शिकायतें मिल चुकी थीं और अगस्त में नई पाइपलाइन बिछाने का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन उसमें देरी हुई। घटना सामने आने के बाद अब युद्ध स्तर पर काम शुरू किया गया है।
इंदौर, जिसे लगातार आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया जा चुका है, वहां इस घटना के बाद नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।





