फैक्ट चेक: संभल हिंसा के दौरान का नहीं है यह पथराव का यह वीडियो, जानें पूरा सच

फैक्ट चेक: संभल हिंसा के दौरान का नहीं है यह पथराव का यह वीडियो, जानें पूरा सच
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, यह वीडियो रोड पर जमा हुई एक भीड़ का है। इसके साथ ही वीडियो में देखा जा सकता है पुलिस इस भीड़ को छितर-बितर करने के लिए लाठियां भांजती दिख रही है। इसी वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि संभल में भीड़ किसी प्रकार का कोई उपद्रव नहीं कर रही थी लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने भीड़ पर लाठियां बरसा दी।
फेसबुक पर वायरल वीडियो को शेयर कर हिंदी भाषा के कैप्शन में लिखा गया है कि “संभल में Uppolice की बर्बरता इस वीडियो में देखिए। प्रदर्शनकारी किसी पर पथराव नहीं कर रहे थे, हिंसा नहीं कर रहे थे। इसके बावजूद पुलिस ने लाठी बरसा दी। हिंसा ऐसे ही नहीं हुई! हिंसा कराई गई है? @India_NHRC @indSupremeCourt इसका संज्ञान लीजिए।”

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।
फैक्ट चेक:
न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल वीडियो हालिया दिनों का नहीं साथ ही यह वीडियो संभल में हुई घटना का नहीं।
सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को देखने पर हमें इसके पुराने होने की आशंका हुई। जिसके बाद हमने अपनी पड़ताल शुरू की। सबसे पहले हमने वायरल वीडियो को कुछ कीफ्रेम्स में तोड़ा और फिर गूगल लेंस टूल के माध्यम से खोजना शुरू किया।
खोज के दौरान हमें वायरल The Hawk Eye नामक ट्विटर पोस्ट पर वायरल वायरल वीडियो मिला। जिसे नवंबर 24, 2024 को अपलोड किया गया था। जहां वायरल वीडियो को शेयर करते हुए यह बताया गया है कि वायरल वीडियो साल 2019 के दौरान गोरखपुर में CAA/NRC के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान का है।
Observe this video carefully. After cops resorted to lathicharge and mob started disbursing, a few of them formed a ducking-wall to retain the position. The formation worked for a while but couldn’t sustain. This is trained mob. They are ready to die.
(2019 Gorakhpur anti-CAA) pic.twitter.com/biSkMz9FFG
— The Hawk Eye (@thehawkeyex) November 24, 2024
उपरोक्त मिले तथ्य की पुष्टि के लिए हमने गूगल पर बारीकी से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो से मेल खता एक दूसरा वीडियो मिला, जिसे MD Asif khan नामक ट्विटर हैंडल द्वारा दिसंबर 21, 2019 को अपलोड किया गया था। हालांकि यह वीडियो वायरल वीडियो से थोड़ा अलग था लेकिन वीडियो की कुछ चीज़ों की तुलना करने पर हमने पाया कि दोनों वीडियो एक ही स्थान के हैं। बता दें कि यहाँ उक्त वीडियो को गोरखपुर की घटना का बताया गया है।
This is from Gorakhpur, Uttar Pradesh.
BJP Govt’s brave UP Police beating up a minor Muslim boy in Gorakhpur.
#CAA_NRC_Protest#IndiaHatesModi pic.twitter.com/VwmLQfiPQ8
— Md Asif Khan (@imMAK02) December 21, 2019
तुलना

2.

पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से हमने जाना कि वायरल वीडियो हालिया दिनों का नहीं बल्कि साल 2019 के दौरान का है, इसके साथ ही वायरल वीडियो संभल में हुई घटना का नहीं बल्कि गोरखपुर है।





