रूस में डिजिटल तख्तापलट! हर फ़ोन में max ऐप अनिवार्य

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कुछ नए कानूनों पर हस्ताक्षर किए हैं जिनका मकसद देश में इंटरनेट पर सरकार का नियंत्रण और कड़ा करना है। इन नियमों के तहत अब रूस की डिजिटल दुनिया को पूरी तरह से सरकार के बनाए ऐप और सेवाओं से विरोध और मज़ाक भी जारी है हालांकि सरकार की सख्ती बढ़ रही है, लेकिन आम लोग अब भी इसका विरोध कर रहे हैं। कई रूसी नागरिक आज भी VPN के ज़रिए WhatsApp, Instagram और Facebook जैसे बैन किए गए प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। MAX ऐप, जिसे सरकार जबरन लोगों के फोन में डाल रही है, अब इंटरनेट पर मज़ाक का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर लोग MAX का जमकर मजाक उड़ा रहे हैं। कुछ मशहूर रूसी इन्फ्लुएंसर सरकार के दबाव में MAX की तारीफ करते हैं, लेकिन वो तारीफ भी इंस्टाग्राम जैसे बैन किए गए प्लेटफॉर्म्स पर ही पोस्ट करते हैं — और इसी वजह से उन्हें जमकर ट्रोल किया जाता है। लेकिन अब सरकार की कार्रवाई और भी सख्त हो रही है। कई ऐसे ब्लॉगर और यूट्यूब चैनल चलाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते थे या VPN को प्रमोट करते थे। ऐसे में रूस में इंटरनेट की आज़ादी को लेकर सरकार और जनता के बीच टकराव हर दिन और बढ़ता जा रहा है।
रूस सरकार इंटरनेट पर पूरी तरह नियंत्रण पाने की कोशिश में एक-एक कदम आगे बढ़ रही है। MAX ऐप इसकी एक बड़ी मिसाल है। WhatsApp और Telegram जैसे लोकप्रिय ऐप्स पर संकट गहरा रहा है, और VPN के इस्तेमाल को लेकर भी अब कानून बेहद सख्त हो चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस ‘सॉवरेन इंटरनेट’ यानी एक बंद और सरकारी निगरानी वाले इंटरनेट सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जहां आम लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। लेकिन इसके खिलाफ जनता का प्रतिरोध भी लगातार जारी है, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह डिजिटल जंग और भी तीखी हो सकती है।





