Fraud and Scam

दिल्ली में ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच साइबर सेल ने ऑनलाइन ठगी के एक बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अनीश सिंह और मणि सिंह के रूप में हुई है। दोनों खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और उनसे लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी करते थे।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में एक महिला पीड़िता को फोन कॉल कर खुद को मुंबई साइबर क्राइम का आईपीएस अधिकारी बताने वाले आरोपी ने दावा किया कि उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल गंभीर अपराधों में हुआ है। आरोपी ने महिला को जांच में फंसने और गिरफ्तारी का डर दिखाया। इसके बाद कॉल को एक महिला अधिकारी बताने वाली व्यक्ति को ट्रांसफर किया गया, जिसने दबाव और बढ़ा दिया।

तीन महीने तक रखा मानसिक दबाव में
आरोपियों ने वॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए पीड़िता को फर्जी एफआईआर और नकली गिरफ्तारी वारंट दिखाए। यह भी कहा गया कि उसके घर के बाहर पुलिस तैनात है। पीड़िता को धमकाया गया कि अगर उसने किसी को भी इस बारे में बताया तो उसे, उसके पति और बेटे को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

15 अक्टूबर 2025 से 12 दिसंबर 2025 तक करीब तीन महीने तक पीड़िता को लगातार कॉल पर रखकर मानसिक दबाव में रखा गया। उसे न तो परिवार से बात करने दी गई और न ही बाहर जाने की इजाजत थी। हर दिन उससे यह पुष्टि करवाई जाती थी कि उसने किसी को कुछ नहीं बताया है।

40 लाख रुपये की ठगी
लगातार डर और धमकियों के बीच पीड़िता से करीब 40 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। रकम लेने के बाद भी आरोपी वेरिफिकेशन और रिफंड का झांसा देकर उसे डर में बनाए रखते थे, ताकि वह पुलिस तक न पहुंच सके।

100 करोड़ से ज्यादा की ठगी का खुलासा
मामले की जांच इंस्पेक्टर संदीप सिंह की अगुवाई में की गई। तकनीकी जांच में सामने आया कि ठगी की रकम वृंदाकार्ट स्काईलाइन शॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के खातों में जा रही थी। इस कंपनी के डायरेक्टर ही आरोपी अनीश सिंह और मणि सिंह हैं।

पुलिस के अनुसार, इसी कंपनी से जुड़े खातों के खिलाफ देशभर में 190 से ज्यादा साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी सामने आ चुकी है। आरोपी कंपनी के नाम पर आठ अलग-अलग बैंक खातों के जरिए पैसों को कई लेयर में घुमाते थे।

पहले भी हो चुके हैं गिरफ्तार
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी फर्जी सिम कार्ड और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे। दोनों को इससे पहले फरीदाबाद पुलिस भी इसी तरह के साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार कर चुकी है।

दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी पुलिस अधिकारी फोन या वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी नहीं करता। ऐसे किसी भी कॉल की स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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