Bihar election 2025: विकास पीछे, जीत आगे — बिहार की उन सीटों की रिपोर्ट जहाँ लगातार तीन चुनाव से चेहरा नहीं बदला

बिहार चुनाव नज़दीक हैं — और ठीक इसी समय सबसे बड़ा सवाल यही है:
क्या उन इलाक़ों में, जहाँ लगातार तीन चुनाव से एक ही MLA जीतता आ रहा है, वहाँ ज़मीन पर विकास वाक़ई पहुँचा है?
NITI Aayog के Aspirational/Champions of Change डेटा के अनुसार पाँच ऐसे जिले है जहाँ विकास सबसे कमजोर हैं। और इन्हीं ज़िलों के भीतर आज हम उन विधानसभा सीटों की बात करेंगे जहाँ एक ही विधायक लगातार तीन चुनाव से निर्वाचित हो रहा है लेकिन स्थिति सुधरी नहीं है।
1) अररिया ज़िला — स्वास्थ्य संकेतकों में गंभीर कमज़ोरी
NITI Aayog के हेल्थ थीम स्कोर्स बताते हैं कि अररिया में maternal-child health, पोषण कवरेज और डॉक्टर/ANM उपलब्धता आज भी राज्य औसत से नीचे है। PHC readiness भी लगातार कमजोर श्रेणी में है।
लगातार जीतने वाली सीट: फ़ारबिसगंज विधानसभा
MLA: विनोद कुमार उर्फ पप्पू यादव (BJP)
लगातार जीत: 2010, 2015, 2020 — तीन बार लगातार
→ यानी राजनीतिक स्थिरता है, पर स्वास्थ्य सेवाएँ अब भी NITI डेटा के अनुसार low-performance band में हैं।
2) कटिहार ज़िला — composite विकास score में लगातार पिछड़ापन
NITI composite index में शिक्षा + आधारभूत सेवाएँ + स्वास्थ्य तीनों पर कुल मिलाकर कटिहार की रैंक नीचे रही। कई primary education indicators में learning levels ध्यान देने लायक कम दर्ज हुए हैं।
लगातार जीतने वाली सीट: बरारी विधानसभा
MLA: विजय कुमार सिंह उर्फ विजय मंडल (JD-U)
लगातार जीत: 2010, 2015, 2020
→ तीनों बार एक ही चेहरा जीतता रहा — पर जिले की कुल composite development रेटिंग में सुधार NITI के अनुसार अभी अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुँच रहा।
3) सीतामढ़ी ज़िला — infrastructure readiness सबसे बड़ा सवाल
Aspirational District parameters दिखाते हैं कि सीतामढ़ी में block-level PHC readiness और rural road connectivity दोनों ही सुधार-विहीन गति में हैं। शिक्षा-स्वास्थ्य दोनों में moderate-to-low स्कोर.
लगातार जीतने वाली सीट: पारू (Paroo) विधानसभा
MLA: प्रेम कुमार (BJP)
लगातार जीत: 2010, 2015, 2020
→ एक ही MLA तीनों बार निर्वाचित, लेकिन सार्वजनिक ढाँचे (roads, centres) की NITI रेटिंग लगातार “चुनौतीपूर्ण” श्रेणी में बरकरार।
4) मुज़फ्फरपुर ज़िला — शिक्षा outcomes अभी भी चिंता का विषय
NITI learning outcomes रिपोर्ट दिखाती है कि कई ब्लॉकों में प्राथमिक कक्षाओं के learning indicators राज्य औसत से नीचे हैं। maternal पोषण संकेतक में भी gaps बने हुए हैं।
लगातार जीतने वाली सीट: बहादुरपुर विधानसभा
MLA: हरि सहनी (JD-U)
लगातार जीत: 2010, 2015, 2020
→ तीन कार्यकालों से एक ही प्रतिनिधि, पर शिक्षा और maternal-health स्कोर अभी भी aspirational targets से नीचे।

5) पूर्णिया ज़िला — स्कूली संरचना और बेसिक सेवाओं में धीमी रफ़्तार
NITI के education infra और basic school-facilities indicators में Purnia का स्कोर कई तिमाहियों में low-ranked रहा है। sanitation और बिजली-कवरेज में भी delta slow improvement.
लगातार जीतने वाली सीट: रनगाँवा (Rupauli) विधानसभा
MLA: बीमा भारती (JDU)
लगातार जीत: 2010, 2015, 2020
→ तीन बार लगातार जीत… लेकिन NITI dashboard अब भी स्थानीय स्कूल-इन्फ्रास्ट्रक्चर को ‘सुधार की आवश्यकता’ श्रेणी में दिखा रहा है।
NITI Aayog की आधिकारिक रैंकिंग स्पष्ट बताती है — इन जिलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढाँचा अभी भी राज्य के सबसे कमजोर वर्ग में हैं। लेकिन वहीं, इन्हीं जिलों के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में एक ही चेहरा लगातार तीन चुनावों से निर्वाचित हुआ है।
चुनाव से पहले स्वाभाविक सवाल यही बनता है — क्या स्थायी राजनीति ने स्थायी विकास दिया?
या फिर यह चुनाव — इन data-backed सवालों को पहली बार मुख्य मंच पर लाएगा?





