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दिल्ली-मुंबई के डॉक्टरों की चेतावनी: दिवाली के बाद बढ़ेगी प्रदूषण से बीमारियों की आशंका

दिवाली नजदीक है और सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सीमित रूप से ‘ग्रीन पटाखों’ के इस्तेमाल की अनुमति दी है। लेकिन दिल्ली और मुंबई के डॉक्टरों ने लोगों को चेतावनी दी है कि त्योहार के दौरान और उसके बाद वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है, जिससे सांस, त्वचा और आंखों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ सकती हैं।

फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग के श्वसन रोग विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. विकास मौर्य ने कहा कि हर साल दिवाली के बाद अस्पतालों में सांस लेने में दिक्कत वाले मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है।

उन्होंने बताया, “पटाखों से निकलने वाली जहरीली गैसें और बहुत महीन धूलकण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच जाते हैं। इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं। यहां तक कि स्वस्थ लोगों को भी परेशानी होती है।”

डॉ. मौर्य ने सलाह दी कि बच्चे, बुजुर्ग और हृदय या श्वसन संबंधी रोगी दिवाली के दौरान विशेष सतर्कता बरतें। वे बाहर निकलने से बचें, N95 मास्क पहनें, खिड़कियां बंद रखें और घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।

वहीं, जुपिटर अस्पताल, ठाणे के इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. अमित सराफ ने बताया कि पटाखों से निकलने वाले प्रदूषक त्वचा और आंखों पर भी असर डालते हैं।

उन्होंने कहा, “जब आतिशबाजी होती है, तो उसमें से निकलने वाले सूक्ष्म कण और भारी धातुएं त्वचा और आंखों पर जम जाती हैं, जिससे जलन, खुजली और सूजन हो सकती है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली खुशियों का त्योहार है, लेकिन उत्सव के साथ स्वास्थ्य की सुरक्षा भी जरूरी है। दिल्ली की हवा पहले से ही खराब श्रेणी में है और मुंबई में भी दिवाली के बाद प्रदूषण स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे पटाखों के बजाय पर्यावरण-हितैषी तरीकों से त्योहार मनाएं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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