भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, इतिहास पर डाले नजर

दुनिया में आपसी जंग और राजनैतिक उथल-पुथल के बीच भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी है. इस गिरावट में लाखों निवेशकों ने अपना सब कुछ डुबा दिया. अब जो लोग बाजार मे हैं उन्हें अपना पैसा निकाल लेना चाहिए या फिर बाजार में बने रहना चाहिए. मतलब आगे भी बाजार में तेजी लौटेगी या नहीं, यह कहना मुस्किल है.
हालांकि यह मार्केट पहली बार नहीं है जो क्रैश हुआ है, मतलब इससे पहले भी कई बार स्टॉक मार्केट क्रैश हो चुका है. तो चलिए एक बार भारतीय शेयर बाजार के इतिहास पर नजर डालते हैं जिसके जरिए आपको यह जानने में आसानी होगी कि आखिर बाजार में आपको बने रहना चाहिए या फिर नहीं.
हर्षद मेहता (1992)
1992 में शेयर बाजार की गिरावट ने हर किसी को तोड़ कर रख दिया था. यह गिरावट हर्षद मेहता सिक्योरिटी घोटाले के कारण आई थी. मेहता ने धोखाधड़ी वाले फंड का इस्तेमाल करके शेयर की कीमतों में हेरफेर की थी. 1992 में सेंसेक्स 4,467 से गिरकर अप्रैल 1993 तक 1,980 पर आ गया. इस गिरावट के बाद बाजार को संभलने में 2 साल लग गए.
एशियाई वित्तीय संकट (1997)
1997 में शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. दिसंबर 1997 में, सेंसेक्स 4,600 अंक से 3,300 अंक तक यानी 28 प्रतिशत से अधिक गिर गया. इस गिरावट का कारण रहा एशियाई वित्तीय संकट.
डॉट-कॉम बबल बर्स्ट (2000)
फरवरी 2000 में सेंसेक्स 5,937 से गिरकर अक्टूबर 2001 में 3,404 पर आ गया, यानि 43 प्रतिशत की गिरावट आई थी.
वैश्विक वित्तीय संकट (2008)
अमेरिका में लेहमैन ब्रदर्स के पतन और सबप्राइम मॉर्गेज संकट ने वैश्विक मंदी को जन्म दिया. जनवरी 2008 में 21,206 के अपने शिखर से अक्टूबर 2008 तक सेंसेक्स 60 प्रतिशत से अधिक गिरकर 8,160 पर आ गया.
वैश्विक मंदी (2015-2016)
जनवरी 2015 में सेंसेक्स 30,000 से फरवरी 2016 में 22,951 पर आ गया. इस दौर में चीन के बाजार में गिरावट, कमोडिटी की कीमतों में गिरावट और घरेलू गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के कारण शेयर बाजार में गिरावट आई.
कोविड-19 (2020)
मार्च 2020 में कोविड के कारण आई महामारी ने शेयर बाजार को धराशाही कर दिया. लॉकडाउन और आर्थिक अनिश्चितता के कारण मार्च 2020 में शेयर बाजार में 39 प्रतिशत की गिरावट आई. जनवरी 2020 में 42,273 से गिरकर मार्च 2020 में 25,638 पर आ गया.





