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‘अंग्रेजों के 1905 में किए पाप के सामने वंदे मातरम् चट्टान की तरह खड़ा रहा…’: लोकसभा में बरसे पीएम मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी आज ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर बहस की अगुवाई करने लोकसभा पहुंचे. जहां उनका जमकर स्वागत हुआ.
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर कहा, “मैं सभी का आभार करता हूं कि हमने इस महत्वपूर्ण अवसर पर एक सामूहिक चर्चा का रास्ता चुना है. जिस मंत्र, जिस जयघोष ने देश के आजादी के आंदोलन को ऊर्जा, प्रेरणा दी थी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था उस वंदे मातरम् का स्मरण करना हम सबका सौभाग्य है. हमारे लिए गर्व की बात है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के इस ऐतिहासिक अवसर के हम साक्षी बन रहे हैं.”
| NDA के वक्ता | विपक्ष के वक्ता |
| PM मोदी | गौरव गोगोई |
| अनुराग ठाकुर | प्रियंका गांधी वाड्रा |
| बिप्लब देब | दीपेंद्र हुड्डा |
| बांसुरी स्वराज | डॉ. बिमोल अकोइजम |
| संबित पात्रा | प्रणीति शिंदे |
| तेजस्वी सूर्या | प्रशांत पडोले |
| संतोष पांडेय | चमाला किरण रेड्डी |
| सौमित्र खान | ज्योत्सना महंत |
| राजनाथ सिंह |
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- प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर कहा, “यही वंदे मातरम् है जिसने 1947 में देश को आज़ादी दिलाई. स्वतंत्रता संग्राम का भावात्मक नेतृत्व इस वंदे मातरम् के जयघोष में था… यहां कोई पक्ष-प्रतिपक्ष नहीं है, हम सबके लिए यह रण स्वीकार करने का अवसर है, जिस वंदे मातरम् के कारण हमारे लोग आज़ादी का आंदोलन चला रहे थे उसी का परिणाम है कि आज हम सब यहां बैठे हैं.”
- “वंदे मातरम् 150 की यह यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी है लेकिन वंदे मातरम् को जब 50 वर्ष हुए तब देश गुलामी में जीने के लिए मजबूर था और वंदे मातरम् के जब 100 साल हुए तब देश आपातकाल की जंजीरों में जक़ड़ा हुआ था…जब वंदे मातरम् 100 साल का हुआ तब देशभक्ति के लिए जीने-मरने वाले लोगों को सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था. जिस वंदे मातरम् के गीत ने देश को आजादी की ऊर्जा दी थी उसके जब 100 साल हुए तो दुर्भाग्य से एक काला कालखंड हमारे इतिहास में उजागर हो गया…150 वर्ष उस महान अध्याय को, उस गौरव को पुनर्स्थापित करने का अवसर है…”
- “वंदे मातरम् की शुरुआत बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने 1875 में की थी, यह गीत उस समय लिखा गया था जब 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज सल्तनत बौखलाई हुई थी, भारत पर भांति-भांति के दबाव डाल रही थी, भांति-भांति के जुल्म कर रही थी… उस समय उनके राष्ट्र गीत को घर-घर तक पहुंचाने का षड्यंत्र चल रहा था, ऐसे समय में बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया और उसमें से वंदे मातरम् का जन्म हुआ…”
- “अंग्रेजों ने बांटों और राज करो, इस रास्ते को चुना और उन्होंने बंगाल को इसकी प्रयोगशाला बनाया क्योंकि वो भी जानते थे कि वो एक वक्त था जब बंगाल का बौद्धिक सामर्थ्य देश को दिशा, ताकत, प्रेरणा देता था और इसलिए अंग्रेज भी जानते थे कि बंगाल का यह जो सामर्थ्य है वो पूरे देश की शक्ति का एक केंद्र बिंदु है और इसलिए अंग्रेजों ने सबसे पहले बंगाल के टुकड़े करने की दिशा में काम किया. अंग्रेजों का मानना था कि एक बार बंगाल टूट गया तो यह देश भी टूट जाएगा…1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया लेकिन जब अंग्रेजों ने 1905 में यह पाप किया तो वंदे मातरम् चट्टान की तरह खड़ा रहा. बंगाल की एकता के लिए वंदे मातरम् गली-गली का नाद बन गया था और वो ही नारा प्रेरणा देता था…”





