इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत, क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया की नजर

इस्लामाबाद में इस सप्ताह अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत होने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि ये वार्ता मध्य पूर्व में शांति और वैश्विक आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर डाल सकती है।
यह बातचीत शनिवार से शुरू होगी। इसमें अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल होंगे। वहीं ईरान का प्रतिनिधित्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची करेंगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की ओर से एक 15 सूत्रीय प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें ईरान से परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ने, अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करने, सैन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध मानने और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने जैसी शर्तें शामिल हैं।
हालांकि, इस बातचीत में सबसे बड़ा विवाद यह है कि क्या लेबनान को संघर्षविराम (सीजफायर) में शामिल किया जाएगा या नहीं। ईरान का कहना है कि समझौते में लेबनान और उसके सहयोगी हिजबुल्लाह को भी शामिल किया जाना चाहिए, जबकि अमेरिका और इज़राइल इससे सहमत नहीं हैं।
इस मुद्दे को लेकर बातचीत से पहले ही तनाव बढ़ गया है। ईरान ने यह भी कहा है कि जब तक लेबनान को लेकर स्पष्टता नहीं होगी और विदेशों में फंसी उसकी संपत्तियां वापस नहीं मिलतीं, तब तक आगे बढ़ना मुश्किल होगा। वहीं अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो इसका असर वैश्विक व्यापार और शांति प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
इन सभी परिस्थितियों के बीच इस्लामाबाद में होने वाली यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसका असर सिर्फ क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।





