भारत में फिर बढ़ने लगे कोरोना केस, 10 दिन में 13 गुना उछाल; केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित

भारत में एक बार फिर कोविड-19 के मामलों में अचानक तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 31 मई को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में इस समय कुल 3,395 सक्रिय मामले दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि ठीक 10 दिन पहले, यानी 22 मई को देश में सिर्फ 257 सक्रिय केस थे। इस तरह, सिर्फ दस दिनों में ही कोरोना के एक्टिव मामलों में 13 गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ है।
इस नई लहर में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य केरल है, जहां 1,336 सक्रिय मामले दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र 467 केसों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फिलहाल 375 एक्टिव केस हैं। अन्य राज्यों की बात करें तो गुजरात में 265, कर्नाटक में 234, पश्चिम बंगाल में 205, तमिलनाडु में 185 और उत्तर प्रदेश में 117 सक्रिय मामले दर्ज किए गए हैं। इन सभी राज्यों में मामलों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक चेतावनी है।
पिछले 24 घंटे में देशभर में 685 नए कोविड मामले सामने आए हैं, वहीं चार लोगों की संक्रमण से मौत की पुष्टि हुई है। जिन राज्यों से ये मौतें रिपोर्ट की गई हैं, उनमें दिल्ली, केरल, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। दिल्ली में जिस बुजुर्ग की मौत हुई, वह 71 वर्षीय पुरुष थे जो निमोनिया, सेप्टिक शॉक और किडनी फेलियर की समस्या से जूझ रहे थे। चिंता की बात यह भी है कि दिल्ली में एक ही दिन में सक्रिय मामलों की संख्या 81 तक बढ़ गई, जो किसी एक दिन में अब तक की सबसे तेज़ वृद्धि है।
हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्थिति पर नियंत्रण होने की बात कहते हुए लोगों से घबराने की बजाय सतर्क रहने की सलाह दी है। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश मरीजों में हल्के लक्षण हैं और वे घर पर ही इलाज करवा रहे हैं। सिर्फ गंभीर मामलों को अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। बीते 24 घंटे के भीतर ही 265 मरीजों को रिकवर होने के बाद डिस्चार्ज भी किया गया है, जो दर्शाता है कि अभी यह संक्रमण उतना गंभीर नहीं है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा है कि कोरोना की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है जिससे चिंता करनी पड़े। उन्होंने कहा कि लोगों को सतर्क रहने की ज़रूरत है लेकिन डरने की नहीं। सरकार की ओर से स्थिति का विश्लेषण करने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग भी की जा रही है।
दिल्ली सरकार ने संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए 23 मई को राजधानी के सभी अस्पतालों को एक विस्तृत सलाह जारी की है। इस सलाह में अस्पतालों को जरूरी दवाएं, ऑक्सीजन सिलेंडर, पर्याप्त संख्या में बेड, वेंटिलेटर और BiPAP मशीनें तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम एहतियातन उठाया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में जरूरी संसाधन उपलब्ध रहें और मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।
कोविड मामलों में इस उछाल के पीछे ओमिक्रॉन के कुछ नए सब-वेरिएंट्स को जिम्मेदार माना जा रहा है। हाल ही में देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में LF.7, XFG, JN.1 और NB.1.8.1 जैसे वेरिएंट्स की पहचान की गई है। डॉ. बहल ने बताया कि ये सभी ओमिक्रॉन के ही रूप हैं और इनसे अभी तक किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इन वेरिएंट्स को ‘Variants Under Monitoring’ की श्रेणी में रखा है, यानी ये ऐसे वेरिएंट हैं जिन पर नजर रखी जा रही है लेकिन अभी इन्हें खतरनाक नहीं माना गया है।
इन वेरिएंट्स की संक्रमण फैलाने की क्षमता जरूर ज्यादा है लेकिन इनसे गंभीर लक्षण उत्पन्न नहीं हो रहे हैं। चीन, ताइवान, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी इन वेरिएंट्स के केस सामने आए हैं, लेकिन वहां भी अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या कम रही है। भारत में भी यही ट्रेंड देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण अब भी संक्रमण से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है। इसके साथ ही, भीड़भाड़ वाली या कम हवादार जगहों पर मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है, खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों को।
फिलहाल भारत में कोविड-19 की स्थिति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अगर लोग सावधानी बरतें, समय पर जांच करवाएं और जरूरत पड़ने पर इलाज लें, तो यह नई लहर भी जल्द काबू में आ सकती है।





