मनोरंजन

कॉमेडियन समय रैना ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त मांगी माफी, संवेदनशील कंटेंट को लेकर दिया बड़ा बयान

कॉमेडियन समय रैना ने अपने शो में दिव्यांगजनों और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने वाले कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने सोमवार को अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा कि उनका मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था और आगे से वह ज्यादा जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कंटेंट बनाएंगे।

समय रैना, जो अब बंद हो चुके शो India Got Latent के होस्ट थे, ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मजाक नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व देना था। वायरल हुए एक वीडियो में वह एक दृष्टिबाधित व्यक्ति से बात करते नजर आए थे। इस पर उन्होंने कहा कि पूरा संवाद देखने पर पता चलता है कि उसमें “प्रोत्साहन और सहानुभूति” थी, न कि उपहास। उन्होंने यह भी बताया कि उसी व्यक्ति को बाद में मुंबई के एक इवेंट में परफॉर्म करने के लिए बुलाया गया था, जहां उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन मिला।

रैना ने कोर्ट में स्वीकार किया कि संवेदनशील लक्षणों से जुड़ी मिमिक्री करते समय ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने माना कि उनकी बातों से अनजाने में किसी को ठेस पहुंची हो सकती है। रैना ने आश्वासन दिया कि वह आगे कंटेंट में ज्यादा सावधानी बरतेंगे और कानून का पालन करेंगे। अपने हलफनामे में समय रैना ने बताया कि उन्होंने करीब 9 लाख रुपये दान किए हैं और सामाजिक कार्यों के लिए 23 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई है। उनका कहना है कि यह उनकी समाजसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पांच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, जिनमें समय रैना भी शामिल हैं, को अपने-अपने प्लेटफॉर्म्स पर बिना शर्त माफी मांगने का आदेश दिया। साथ ही, जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने केंद्र सरकार को ऐसे कंटेंट के लिए दिशा-निर्देश बनाने को कहा, जो महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों जैसी संवेदनशील श्रेणियों का अपमान करता हो।

 

Show More

न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

"न्यूज़ मोबाइल हिंदी" एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है जो पाठकों को ताज़ा ख़बरें, गहन विश्लेषण और अपडेट सरल हिंदी में उपलब्ध कराता है। यह राजनीति, खेल, तकनीक, मनोरंजन और बिज़नेस जैसे विषयों पर समाचार प्रस्तुत करता है। साथ ही, इसमें फ़ैक्ट चेक (Fact Check) सेक्शन भी है, जिसके ज़रिए झूठी या भ्रामक ख़बरों की सच्चाई सामने लाकर पाठकों को विश्वसनीय और सही जानकारी दी जाती है। इसका मक़सद है—समाचारों के बीच तथ्य और अफ़वाह में स्पष्ट अंतर दिखाना।
Back to top button