कोल्ड्रिफ कफ सिरप से देशभर में हड़कंप, केंद्र की एडवाइजरी के बाद राज्यों में छापेमारी तेज़

देशभर में बच्चों की मौत का कारण बनी ‘कोल्ड्रिफ कफ सिरप’ अब कई राज्यों में प्रतिबंधित कर दी गई है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में मासूमों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश, झारखंड, दिल्ली, केरल, तमिलनाडु और उत्तराखंड समेत कई राज्यों ने इस दवा की बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी है।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सर्दी-जुकाम से पीड़ित बच्चों को दी गई कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों को पेशाब रुकने और किडनी फेल होने जैसी समस्या हुई, जिसके चलते अब तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं राजस्थान में चार बच्चों की जान चली गई।
तमिलनाडु सरकार ने जांच के दौरान पाया कि ‘कोल्ड्रिफ कफ सिरप’ के एसआर-13 बैच में खतरनाक केमिकल डायथिलीन ग्लाइकोल (DEG) की मात्रा निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है। यह वही केमिकल है, जो पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय कफ सिरप त्रासदियों में दर्ज हो चुका है।
किन राज्यों ने की कार्रवाई
तमिलनाडु में जांच रिपोर्ट आने के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड, केरल, दिल्ली और उत्तराखंड सरकारें तुरंत हरकत में आ गईं।
मध्य प्रदेश ने कंपनी के सभी उत्पादों पर बैन लगा दिया है।
राजस्थान ने जयपुर की कायसन फार्मा द्वारा बनी खांसी की सभी 19 दवाओं पर रोक लगा दी है।
झारखंड ने कोल्ड्रिफ, रेस्पीफ्रेश और रिलाइफ सिरप की बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध लगा दिया है।
उत्तराखंड में दवा दुकानों पर छापेमारी चल रही है, जबकि
उत्तर प्रदेश ने सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि यह सिरप मरीजों को न दी जाए।
किस कंपनी ने बनाई यह कफ सिरप?
जानकारी के अनुसार, यह खतरनाक कफ सिरप चेन्नई स्थित कंपनी ‘श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स’ (Sresan Pharmaceuticals) ने बनाई थी। यह कंपनी 1990 में प्राइवेट लिमिटेड के रूप में रजिस्टर्ड हुई थी, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक अब यह कंपनी आधिकारिक रूप से बंद हो चुकी है।
कंपनी के निदेशकों में रंगनाथन गोविंदन, रंगनाथन गोविंदराजन, रंगनाथन रानी और गोविंदन बाला सुब्रमण्यम के नाम दर्ज हैं। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी की आखिरी वार्षिक आम बैठक 2009 में हुई थी और तब से कोई वित्तीय रिपोर्ट या दस्तावेज दाखिल नहीं किए गए।
मध्य प्रदेश पुलिस ने चेन्नई स्थित ‘श्रीसन फार्मास्यूटिकल मेकर’ के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इसके अलावा, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भी तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित उत्पादन इकाई का निरीक्षण शुरू कर दिया है।
जांच में क्या मिला?
तमिलनाडु की रिपोर्ट में पाया गया कि डायथिलीन ग्लाइकोल की मात्रा 48.6% तक पहुंच गई थी, जबकि इसकी सुरक्षित सीमा मात्र 0.1% है। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह अत्यंत विषैला रसायन है जो किडनी और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।
सरकारों ने जारी की चेतावनी
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी करते हुए निर्देश दिया है कि वे सभी बैच की जांच करें और किसी भी संदिग्ध सिरप की बिक्री तुरंत रोकी जाए। डॉक्टरों और फार्मासिस्टों से कहा गया है कि वे खांसी की दवाएं लिखते समय सावधानी बरतें, खासकर छोटे बच्चों के लिए।
क्या कह रही हैं राज्य सरकारें?
राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा है कि राज्य की लैब में जांच के अनुसार सिरप सुरक्षित पाया गया है, हालांकि एहतियात के तौर पर इसकी सप्लाई रोक दी गई है। वहीं, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि “जनस्वास्थ्य के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
देशभर में अब कोल्ड्रिफ कफ सिरप और उससे जुड़ी कंपनियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। केंद्र से लेकर राज्यों तक जांच जारी है। तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई बच्चों की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दवा उत्पादन और उसकी निगरानी में लापरवाही आखिर कब खत्म होगी?





