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दिल्ली में तीसरी बार घमासान, शंभू बॉर्डर से आगे बढ़ा 101 किसानों का काफिला

पंजाब और हरियाणा की सीमी पर किसानों के जत्थे ने अपना मार्च शुरू कर दिया है. शंभू बॉर्डर पर आज 101 किसानों के जत्थे ने दोपहर 12 बजे दिल्ली के लिए अपना पैदल मार्च शुरू कर दिया. शंभू बॉर्डर से दिल्ली की ओर किसानों का विरोध मार्च फिर से शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही हरियाणा सरकार ने ‘सार्वजनिक शांति’ बनाए रखने के लिए अंबाला जिले के 12 गांवों में मोबाइल इंटरनेट और एक साथ कई एसएमएस भेजने की सेवाओं को निलंबित कर दिया था.

 

पुलिस ने किसानों को रोकने की पूरी तैयारी कर रखी है. अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सुमिता मिश्रा द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह निलंबन 17 दिसंबर तक लागू रहेगा.

 

पंजाब-हरियाणा शंभू सीमा पर किसानों ने अपना ‘दिल्ली चलो’ मार्च शुरू किया. फिलहाल, आगे बढ़ रहे किसानों को पुलिस ने रोक दिया है. एक किसान ने कहा, “हमें जाने की अनुमति दी जानी चाहिए. राष्ट्रीय राजधानी में जाकर विरोध करना हमारा अधिकार है, हमारी आवाज नहीं दबाई जानी चाहिए.”

हरियाणा की सीमा पर सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती की गई है. इससे पहले हरियाणा सरकार ने छह से नौ दिसंबर तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं, एक साथ कई एसएमएस भेजने की सेवाएं निलंबित कर दी थीं. शनिवार को जारी एक नए आदेश में मिश्रा ने कहा, “मुझे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, मैं वॉइस कॉल को छोड़कर मोबाइल इंटरनेट सेवाओं, बल्क एसएमएस और मोबाइल नेटवर्क पर प्रदान की जाने वाली सभी डोंगल सेवाओं को निलंबित करने का आदेश देती हूं.”

 

हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर पुलिस का ऐलान, किसानों से कहा-जब तक आप शांतिपूर्वक हो, हम आपसे दोगुना शांतिपूर्वक हैं. अगर आपको दिल्ली जाकर धरना देना है तो आप परमिशन के लिए अप्लाई कर दें और अगर परमिशन मिलती है तो हम आपको खुद वहाँ पर छोड़कर आएंगे. आप यहाँ शांतिपूर्वक बैठिये, हम आपके साथ हैं. हम आपको खुद छोड़कर आएंगे वहाँ पर. सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, कृपया उसकी पालना कीजिए.

 

हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने किसानों के दिल्ली कूच करने पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि किसानों की चर्चा सुप्रीम कोर्ट से चल रही है और सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि किसानों के साथ जो चर्चा चल रही है वह ठीक ट्रैक पर है. उसके लिए हमें थोड़ा समय चाहिए और किसानों को थोड़े समय के लिए अपना आंदोलन स्थगित कर देना चाहिए. विज ने कहा कि मुझे भी लगता है कि किसानों को सुप्रीम कोर्ट की राय मान लेनी चाहिए.

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