सिविल-मिलिट्री फ्यूजन केवल रक्षा तक सीमित नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार: सीडीएस चौहान

दिल्ली में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सरकार द्वारा उनकी नियुक्ति के बाद उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक थल, जल और वायु सेना में एकता और समन्वय (जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन) को बढ़ाना है। उन्होंने इसे चुनौतीपूर्ण लेकिन अत्यंत आवश्यक कार्य बताया।
जनरल चौहान ने कहा कि सिविल-मिलिट्री फ्यूजन (नागरिक और सैन्य समन्वय) केवल रक्षा के दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर समग्र शक्ति और सुरक्षा का मापदंड है। उनका मानना है कि देश की शक्ति तभी मजबूत होगी जब नीतिगत और सैन्य ढांचे में तालमेल स्थापित होगा। उन्होंने हाल ही में आयोजित कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को कई अहम दिशा-निर्देश दिए हैं, जिनमें कुछ क्षेत्रों में सेना को नेतृत्व करते हुए एकीकरण और सहयोग बढ़ाने का निर्देश भी शामिल है।
जनरल चौहान ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राज शुक्ला की किताब ने उन्हें इस विषय को समझने में प्रेरणा दी है। उन्होंने बताया कि भारत ने सिविल-मिलिट्री फ्यूजन के क्षेत्र में कई प्रयास किए हैं, लेकिन अभी इस पर और काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज शुक्ला की किताब में दिए विचार न केवल वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य बल्कि भविष्य की रणनीतिक दिशा तय करने में भी मदद करेंगे।
कार्यक्रम में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने करियर में लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला से कई महत्वपूर्ण बातें सीखी, जिनमें ऑपरेशन सिंदूर की नींव भी शामिल है। उन्होंने 2016 में हुए उरी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय राज शुक्ला ने संभावित जवाबी रणनीति और भविष्य की तैयारी पर विस्तृत चर्चा की थी, जो उनके लिए उस स्थिति का सामना करने में मददगार साबित हुई।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। पहली किताब ‘सिविल मिलिट्री फ्यूजन एज अ मेट्रिक ऑफ नेशनल पावर एंड कॉम्प्रेहेंसिव सिक्योरिटी’ भारत की रणनीतिक सोच और नीतिगत समन्वय पर केंद्रित है, जबकि दूसरी किताब ‘पोर्ट्रेट्स ऑफ वेलर: टाइमलेस मिलिट्री आर्ट’ भारतीय सैन्य इतिहास और कला पर आधारित कॉफी टेबल बुक है।





