
दिल्ली और आसपास के इलाकों में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच अब चीन ने भारत की मदद की पेशकश की है। चीन के दूतावास ने बुधवार को ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह भारत के साथ प्रदूषण नियंत्रण का अपना अनुभव साझा करने के लिए तैयार है, ताकि दिल्ली और अन्य शहरों में हवा को साफ किया जा सके। चीन की दूतावास प्रवक्ता यू जिंग ने अपने बयान में कहा, “चीन ने भी कभी गंभीर स्मॉग का सामना किया था। हम जानते हैं कि साफ आसमान पाना कितना मुश्किल होता है, लेकिन हमने यह सफर तय किया है और हमें यकीन है कि भारत भी जल्द वहां पहुंचेगा।”
China once struggled with severe smog, too.
We stand ready to share our journey toward blue ones—and believe India will get there soon. ☀💙 #CleanAir #TogetherForEarth pic.twitter.com/VJQoa6ap1V
— Yu Jing (@ChinaSpox_India) November 4, 2025
चीन ने बीते दशक में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई सख्त कदम उठाए थे। साल 2013 में चीन सरकार ने “प्रदूषण के खिलाफ युद्ध” की घोषणा की थी। इसके तहत औद्योगिक इकाइयों पर कड़ा नियंत्रण लगाया गया, पुराने वाहनों को सड़कों से हटाया गया और कोयले की जगह प्राकृतिक गैस और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ाया गया। सरकार ने कई उद्योगों को शहरों से दूर स्थानांतरित किया। इस अभियान में करीब 100 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए गए। बीजिंग प्रशासन के मुताबिक, अब शहर में हर साल पहले की तुलना में 100 से ज्यादा दिन साफ आसमान देखने को मिलते हैं।
वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए चीन ने बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान भी चलाया। “ग्रेट ग्रीन वॉल” जैसे कार्यक्रमों के तहत 12 प्रांतों में 35 अरब से अधिक पेड़ लगाए गए। पर्यावरण संबंधी रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन का प्रति हेक्टेयर वनीकरण पर खर्च अमेरिका और यूरोप से तीन गुना अधिक रहा। इन प्रयासों के चलते बीजिंग और शंघाई जैसे शहरों में हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
वहीं, दिल्ली की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। क्लाउड सीडिंग ट्रायल्स के एक हफ्ते बाद भी राजधानी की हवा में केवल मामूली सुधार दर्ज किया गया। बुधवार सुबह 9 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 228 था, जो शाम 4 बजे घटकर 202 पर पहुंचा। हालांकि यह स्तर अब भी ‘खराब श्रेणी’ में ही आता है। मंगलवार को दिल्ली का AQI 291 था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, आनंद विहार में AQI 279, लोदी रोड पर 213, ITO पर 274, आरके पुरम में 223, जहांगीरपुरी में 235, चांदनी चौक में 228 और सिरीफोर्ट में 263 दर्ज किया गया।
CPCB के मानकों के अनुसार, 0 से 50 तक का AQI ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। ‘खराब’ श्रेणी में हवा का रहना लंबे समय तक सांस की तकलीफ और फेफड़ों की बीमारी का कारण बन सकता है।
चीन की इस पेशकश के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए चीन के मॉडल को अपनाने पर विचार करेगी या दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए कोई नया समाधान खोजेगी।





