एयर इंडिया हादसे की जांच पर सवाल, कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 क्रैश मामले में जांच की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 241 यात्री और क्रू सदस्य शामिल थे। अब कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। पुष्कराज सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने मिलकर 10 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने मांग की है कि एयर इंडिया AI171 दुर्घटना की जांच एक न्यायिक निगरानी समिति (Judicially Monitored Committee) के तहत हो।
याचिका में कहा गया है कि अब तक एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा की गई जांच को बंद घोषित किया जाए और उससे जुड़ा सारा सबूत, डेटा और दस्तावेज एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता वाली नई समिति को सौंपे जाएं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी है। इसमें यह भी कहा गया कि बोइंग 787 विमान में तकनीकी और डिजाइन स्तर की खामियों की जांच नहीं की गई और जानबूझकर पायलट को दोषी ठहराने की कोशिश की गई।
पुष्कराज सभरवाल का कहना है कि AAIB ने इस तरह की जांच करके अपनी विश्वसनीयता और स्वतंत्रता को प्रभावित किया है, जिससे भारत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ICAO Annex 13 के तहत जवाबदेही बनती है। 91 वर्षीय पुष्कराज सभरवाल ने इससे पहले नागरिक उड्डयन सचिव और AAIB के महानिदेशक को पत्र लिखकर रूल 12 के तहत औपचारिक जांच की मांग की थी। इस नियम के अनुसार, केंद्र सरकार किसी विमान हादसे की गंभीरता को देखते हुए औपचारिक जांच का आदेश दे सकती है।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि मीडिया में चयनात्मक लीक और झूठी अफवाहों से यह प्रचारित किया गया कि उनके बेटे कैप्टन सुमीत मानसिक तनाव में थे या आत्महत्या करना चाहते थे। पुष्कराज ने लिखा, “इन अफवाहों ने न केवल मेरे बेटे की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है बल्कि मेरे मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित किया है। यह मेरे बेटे के सम्मान के खिलाफ है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसकी मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।”
पत्र में पुष्कराज ने बताया कि उनके बेटे को 25 साल से ज़्यादा का उड़ान अनुभव था। उन्होंने अब तक 15,600 घंटे से अधिक उड़ान भरी थी, जिनमें से 8,500 घंटे बोइंग 787 विमान पर थे। वे DGCA द्वारा लाइसेंस प्राप्त लाइन ट्रेनिंग कैप्टन थे और अपने पूरे करियर में कभी किसी हादसे में शामिल नहीं रहे।
AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट (12 जुलाई) में कहा गया था कि विमान के दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई एक सेकंड के अंतराल में बंद हो गई, जिससे उड़ान भरते ही पायलटों में भ्रम की स्थिति बन गई। रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता है, “तुमने फ्यूल कट किया?” जिस पर दूसरा कहता है, “नहीं, मैंने नहीं किया।” पुष्कराज का कहना है कि यह रिपोर्ट अधूरी और भ्रामक है। इसमें हादसे के असली कारणों की बजाय बोइंग कंपनी को क्लीन चिट देने की कोशिश की गई है और पायलट को गलत ठहराया गया है।
इन आरोपों पर AAIB ने कहा है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी। ब्यूरो ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहें फैलाने से बचें और अंतिम रिपोर्ट आने का इंतज़ार करें, जिसमें हादसे के असली कारण स्पष्ट किए जाएंगे।





