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Budget 2026 | टैक्स से ट्रेज़री तक, जानें सरकार कैसे जुटाती है बजट का पैसा

नई दिल्ली: संसद में शीघ्र ही पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 को लेकर देशभर में उत्सुकता का माहौल है. आम नागरिकों से लेकर उद्योग जगत तक सभी की निगाहें वित्त मंत्रालय की इस वार्षिक घोषणा पर टिकी हैं. कर छूट, नई कल्याणकारी पहल, स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्र में आवंटन जैसे मुद्दे हमेशा चर्चा में रहते हैं.

लेकिन एक प्रमुख जिज्ञासा जो अक्सर उठती है वह यह कि आखिर सरकारी तिजोरी में धन का प्रवाह किन स्रोतों से होता है और इसका उपयोग किन मदों में किया जाता है? आइए समझते हैं सरकारी वित्त व्यवस्था का पूरा तंत्र.

सरकारी राजस्व के प्रमुख स्रोत

सरकार की आय का स्रोत एकल नहीं बल्कि विविध है. आम धारणा के विपरीत, कराधान सबसे बड़ा राजस्व स्रोत नहीं है. वास्तव में, सरकारी बजट का सबसे बड़ा घटक – लगभग 24 प्रतिशत – ऋण और अन्य देनदारियों से आता है. यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार अपने व्यय को पूरा करने के लिए बाजार से उधार लेती है.

राजस्व संग्रह में दूसरा सबसे बड़ा योगदान व्यक्तिगत आयकर का है, जो कुल का 22 प्रतिशत है. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 18 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि कॉर्पोरेट कर से 17 प्रतिशत राजस्व प्राप्त होता है.

अन्य महत्वपूर्ण स्रोतों में उत्पाद शुल्क (5 प्रतिशत), सीमा शुल्क (4 प्रतिशत) और गैर-कर राजस्व (9 प्रतिशत) शामिल हैं. विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण जैसी गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां सबसे कम – मात्र 1 प्रतिशत का योगदान देती हैं.

कराधान: राजकोषीय ढांचे की रीढ़

हालांकि सबसे बड़ा स्रोत नहीं, फिर भी कराधान को सरकारी वित्त का सबसे मजबूत आधार माना जाता है. कर व्यवस्था दो श्रेणियों में विभाजित है:

प्रत्यक्ष कर: इसमें आयकर और कॉर्पोरेट कर शामिल हैं जो व्यक्तियों और संस्थाओं की आय पर सीधे लगाए जाते हैं.

अप्रत्यक्ष कर: यह वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर लगता है. जीएसटी इसका प्रमुख उदाहरण है, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क भी इसी श्रेणी में आता है.

गैर-कर राजस्व और ऋण संग्रहण

टैक्स के अतिरिक्त, सरकार को अनेक गैर-कर माध्यमों से भी आय प्राप्त होती है. सरकारी सेवाओं के शुल्क, दंड राशि, लाइसेंस फीस, सार्वजनिक उपक्रमों से लाभांश और प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी इसके प्रमुख घटक हैं.

जब राजस्व व्यय की तुलना में अपर्याप्त होता है, तब सरकार उधारी का सहारा लेती है. यह सरकारी प्रतिभूतियों, लघु बचत योजनाओं और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से ऋण के माध्यम से होता है. कभी-कभी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर भी धन जुटाया जाता है.

व्यय का विवरण: कहां जाता है हर रुपया

सरकारी व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा – 30 प्रतिशत – राज्य सरकारों को हस्तांतरित किया जाता है. यह संघीय ढांचे का अनिवार्य हिस्सा है.

दूसरा सबसे बड़ा व्यय ब्याज भुगतान पर होता है, जो कुल खर्च का लगभग 20 प्रतिशत है. यह अनिवार्य व्यय है जिसे सरकार कम नहीं कर सकती.

शेष व्यय इस प्रकार वितरित होता है:

  • केंद्रीय योजनाएं: 16 प्रतिशत
  • केंद्र प्रायोजित योजनाएं: 8 प्रतिशत
  • रक्षा: 8 प्रतिशत
  • सब्सिडी: 6 प्रतिशत
  • पेंशन: 4 प्रतिशत
  • अन्य मदें: 8 प्रतिशत

बजट 2026 में इन आंकड़ों में क्या बदलाव आएगा, यह जानने के लिए पूरे देश की निगाहें संसद पर टिकी हैं.

 

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