गुजरात में बीएसएफ की बड़ी कार्रवाई – 15 पाकिस्तानी मछुआरे गिरफ्तार
गुजरात में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कोरी क्रीक क्षेत्र में बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) बीबीके के पास 15 पाकिस्तानी मछुआरों को गिरफ्तार किया है। ये सभी मछुआरे इंजन लगी एक देशी नाव के साथ भारतीय सीमा में घुस आए थे। अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन को 68 बटालियन बीएसएफ, 176 बटालियन बीएसएफ और वाटर विंग ने मिलकर अंजाम दिया। टीम ने स्थानीय गश्ती नौकाओं की मदद से आसपास के क्रीक इलाकों में तलाशी अभियान चलाया और इसमें तेज गति वाली गश्ती नौकाओं का भी इस्तेमाल किया गया।

गुजरात में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कोरी क्रीक क्षेत्र में बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) बीबीके के पास 15 पाकिस्तानी मछुआरों को गिरफ्तार किया है। ये सभी मछुआरे इंजन लगी एक देशी नाव के साथ भारतीय सीमा में घुस आए थे। अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन को 68 बटालियन बीएसएफ, 176 बटालियन बीएसएफ और वाटर विंग ने मिलकर अंजाम दिया। टीम ने स्थानीय गश्ती नौकाओं की मदद से आसपास के क्रीक इलाकों में तलाशी अभियान चलाया और इसमें तेज गति वाली गश्ती नौकाओं का भी इस्तेमाल किया गया।
इससे पहले बीएसएफ ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में एक बांग्लादेशी पुलिस अधिकारी को भी पकड़ा था। जानकारी के अनुसार, यह अधिकारी भारतीय सीमा में अवैध रूप से घुसने की कोशिश कर रहा था। बीएसएफ ने उसे शाम 6 से 7 बजे के बीच हकीमपुर बॉर्डर आउटपोस्ट के पास गिरफ्तार किया।
नियमित गश्त के दौरान बीएसएफ जवानों ने उसे रोका और तलाशी ली। जांच में पता चला कि उसके पास कई पहचान पत्र थे, जिससे उसकी पहचान बांग्लादेश पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में हुई। बीएसएफ ने तुरंत उसे हिरासत में लिया और आगे की पूछताछ के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस को सौंप दिया। फिलहाल जांच की जा रही है कि उसने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ क्यों की और क्या वह अकेले काम कर रहा था या किसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।
भारत और बांग्लादेश की सीमा 4,096 किलोमीटर लंबी है, जो दुनिया की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक है। इस सीमा का लगभग 2,217 किलोमीटर हिस्सा पश्चिम बंगाल में आता है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां अक्सर अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराध के मामले सामने आते हैं। उत्तर 24 परगना जिला विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि यह घनी आबादी, नदी तटीय इलाके और शहरी केंद्रों के नजदीक होने के कारण तस्करों और दलालों की सक्रियता का केंद्र बना रहता है।





