
पटना: बिहार सरकार ने राज्य में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने के लिए ‘शिवा सर्किट’ विकसित करने का फैसला किया है। बुधवार को विधानसभा में सड़क निर्माण मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने इसकी घोषणा की। यह फैसला उस समय सामने आया जब जदयू विधायक बिनय कुमार चौधरी समेत एनडीए के कई विधायकों ने प्रमुख शिव मंदिरों वाले शहरों तक बेहतर सड़क और संपर्क सुविधा की मांग उठाई।
सदन में चर्चा के दौरान मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की मांग को गंभीरता से लेते हुए सरकार एक विस्तृत योजना तैयार करेगी। इसके तहत राज्य के उन शहरों और कस्बों को मजबूत सड़कों तथा आधारभूत सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, जहां प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर स्थित हैं। उनका मानना है कि इससे श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
जायसवाल ने सभी विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद प्रमुख शिवालयों की सूची देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सूचियां मिलने के बाद विभाग एक समग्र खाका तैयार करेगा, जिसमें इन धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव होगा। योजना को अंतिम रूप देने के बाद केंद्र सरकार से स्वीकृति और आर्थिक सहयोग मांगा जाएगा।
मंत्री ने बताया कि यह पहल बुद्ध सर्किट और रामायण सर्किट की तर्ज पर विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि शिव मंदिरों से जुड़ी ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत का संरक्षण भी है।
भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने सुझाव दिया कि सर्किट में मधुबनी का सिमरिया धाम, भागलपुर का कहलगांव, गया का बैजू धाम, सोनपुर और मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख स्थलों को शामिल किया जाए। अन्य सदस्यों ने भी श्रावण महीने में लाखों श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का जिक्र करते हुए बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत बताई।
विधायकों ने यह भी कहा कि बाबा गरीब स्थान, बटेश्वरस्थान और अन्य प्राचीन मंदिरों तक पहुंचने वाले मार्गों का उन्नयन समय की मांग है। सरकार की इस पहल को राज्य में आस्था और पर्यटन के संगम को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।





