अमेरिका जाने वालों के लिए बड़ा झटका! H-1B वीज़ा के लिए $100,000 का शुल्क

वाशिंगटन डी.सी.: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत एच-1बी वीज़ा पर 1,00,000 डॉलर का नया शुल्क लगाया गया है. मतलब H-1B वीज़ा के लिए हर साल $100,000 देना होगा. रुपये में समझें तो करीब 80 लाख रुपये. अब तक H-1B वीज़ा आवेदनों के लिए अमेरिकी कंपनियां ही पेमेंट करती थीं, अब ट्रंप के इस नये आदेश से उनकी टेंशन भी बढ़ गई है.
President Donald Trump signed an Executive Order to raise the fee that companies pay to sponsor H-1B applicants to $100,000@POTUS pic.twitter.com/jNx5sib0Oi
— NewsMobile (@NewsMobileIndia) September 20, 2025
एक अलग घोषणा में, ट्रंप ने एक ‘गोल्ड कार्ड’ वीज़ा भी पेश किया, जो धनी व्यक्तियों को 10 लाख डॉलर के वार्षिक शुल्क के बदले नागरिकता का मार्ग प्रदान करेगा.

H-1B वीज़ा पर आगे बात करने से पहले ट्रंप के दो और ऑफर जान लीजिए. अमेरिकी नागरिकता के लिए ट्रंप अब $1 मिलियन का “गोल्ड कार्ड” वीजा देने वाले हैं. ट्रंप प्लैटिनम कार्ड” $50 लाख के योगदान पर उपलब्ध होगा और इससे विदेशियों को गैर-अमेरिकी आय पर अमेरिकी करों के बिना 270 दिन तक अमेरिका में रहने की अनुमति मिलेगी. ट्रंप को इन मनमाने फैसलों के लिए हो सकता है अमेरिकी अदालतों से भी टकराना पड़े, क्योंकि राष्ट्रपति अपने अधिकारों से आगे बढ़कर फैसले ले रहे हैं. उन्होंने ये फैसले लेने के लिए कांग्रेस को दरकिनार किया है. यदि ये कार्य कानूनी रूप से टिकते हैं, तो ये 1990 में कांग्रेस द्वारा निर्मित हाई स्किल्ड और निवेशक वीज़ा की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि करेंगे.
एच-1बी वीज़ा क्या है?
एच-1बी वीज़ा का मकसद उच्च कौशल वाली नौकरियों के लिए विदेशों से प्रतिभाशाली पेशेवरों को अमेरिका लाना है. अक्सर तकनीकी कंपनियों को ऐसी नौकरियों के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी नहीं मिल पाते.
यह कार्यक्रम 1990 में शुरू किया गया था, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) जैसे क्षेत्रों में स्नातक या उससे उच्च डिग्री हो, और जहां नौकरियों को भरना कठिन माना जाता है.
हालांकि आलोचक कहते हैं कि इस वीज़ा के जरिए कंपनियों को कम वेतन पर कर्मचारियों को रखने और श्रमिक सुरक्षा में कटौती करने का मौका मिलता है.
हर साल 85,000 एच-1बी वीज़ा जारी किए जाते हैं, जो लॉटरी प्रणाली के तहत आवंटित होते हैं. यह वीज़ा तीन साल के लिए मान्य होता है और इसे अतिरिक्त तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है. अगर नियोक्ता कर्मचारी को ग्रीन कार्ड के लिए प्रायोजित करे, तो स्थायी निवास मिलने तक वीज़ा का नवीनीकरण किया जा सकता है.





