ट्रंप के टैरिफ ऐलान से एशियाई बाजार भी धराशायी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी इक्विटी बेंचमार्क में 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि पिछले तीन दिनों से बाजार में तेजी का दौर जारी था। निवेशकों को उम्मीद थी कि ट्रंप अपेक्षाकृत नरम टैरिफ नीति अपनाएंगे, लेकिन उनके सख्त फैसले से बाजार में गिरावट आ गई।
टैरिफ घोषणा के बाद एस एंड पी 500 की निगरानी करने वाले 577 अरब डॉलर के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में 2.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ट्रंप ने टैरिफ को “मुक्ति दिवस” करार देते हुए 10 प्रतिशत न्यूनतम टैरिफ लागू करने और 60 देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की। यह अतिरिक्त शुल्क उन देशों पर लगाया गया है, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है या जो अमेरिका पर अधिक टैरिफ लगाते हैं।
ट्रंप ने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके अच्छे मित्र हैं, लेकिन भारत अमेरिका पर 52 प्रतिशत टैरिफ लगाता है, जबकि अमेरिका ने वर्षों तक कोई कर नहीं लगाया। इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ नीति के कारण आने वाले दिनों में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसके चलते अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ेगा। ट्रंप ने भी स्वीकार किया कि टैरिफ से अल्पकालिक मंदी की संभावना है, लेकिन उन्होंने इसे अस्थायी बताया। इसके अलावा, अन्य देश भी जवाबी कार्रवाई में अमेरिका पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। टैरिफ की घोषणा के बाद डॉलर की कीमतों में भी 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
ट्रंप के टैरिफ ऐलान के असर से एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखी गई। टोक्यो निकेई 225 इंडेक्स में 3.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि बाद में इसमें सुधार हुआ और यह 2.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ 34,699.52 अंक पर बंद हुआ। अमेरिका ने जापान पर 24 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जिससे इन देशों के बाजारों में गिरावट आई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.9 प्रतिशत गिर गया, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एस एंड पी/एएसएक्स 1.8 प्रतिशत गिरकर 7,793 अंकों पर बंद हुआ।
यह नई टैरिफ नीति अमेरिका और उसके व्यापारिक भागीदारों के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकती है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रहेगी।





