श्रीलंका के नए राष्ट्रपति बने अनुरा कुमारा दिसानायके, पीएम मोदी ने दी बधाई

श्रीलंका के नए राष्ट्रपति बने अनुरा कुमारा दिसानायके, पीएम मोदी ने दी बधाई
श्रीलंका की जनता ने कलबो से सांसद अनुरा कुमारा दिसानायके को अपना नया राष्ट्रपति चुना है। अनुरा कुमारा दिसानायके ने तीन नामी उम्मीदवारों- नमल राजपक्षे, साजिद प्रेमदासा और रानिल विक्रमसिंघे को इस चुनाव में हराकर राष्ट्रपति का चुनाव जीता है। बता दें कि श्रीलंका के इतिहास में यह पहला मौका है जब श्रीलंका में कोई वामपंथी नेता राष्ट्रपति के पद पर बैठेगा।
उनके जीत के इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि श्रीलंका भारत की पड़ोस प्रथम नीति और विजन SAGAR में एक विशेष स्थान रखता है। मैं अपने लोगों और पूरे क्षेत्र के लाभ के लिए हमारे बहुआयामी सहयोग को और मजबूत करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हूं।
Congratulations @anuradisanayake, on your victory in the Sri Lankan Presidential elections. Sri Lanka holds a special place in India’s Neighbourhood First Policy and Vision SAGAR. I look forward to working closely with you to further strengthen our multifaceted cooperation for…
— Narendra Modi (@narendramodi) September 22, 2024
गौरतलब है कि 55 साल के दिसानायके नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) गठबंधन के प्रमुख हैं। अपनी इस जीत के बाद अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि हजारों लोगों के प्रयास का नतीजा है। पहले राउंड के वोटों की गितनी में किसी भी उम्मीदवार को 50 फ़ीसदी से अधिक वोट नहीं मिल पाए। इस राउंड में अनुरा दिसानायके को 42.31 फ़ीसदी और उनके प्रतिद्वंद्वी रहे सजीथ प्रेमदासा को 32.76 फ़ीसदी वोट मिले। इस कारण चुनाव आयोग ने दूसरे दौर की गिनती शुरू की, जिसके बाद शाम को अनुरा दिसानायके श्रीलंका के नौवें राष्ट्रपति के रूप में चुने गए।
बता दें कि दिसानायके का जन्म श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से 100 किलोमीटर दूर थंबुट्टेगामा में एक दिहाड़ी मजदूर के घर हुआ था। दिसानायके अपने परिवार के गांव से विश्वविद्यालय जाने वाले पहले छात्र थे। एक बातचीत में उन्होंने बताया था कि शुरुआत में पेराडेनिया विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था लेकिन राजनीतिक विचारधाराओं के कारण धमकियां मिलने लगीं और वह केलानिया यूनिवर्सिटी आ गए। दिसानायके ने 80 के दशक में छात्र राजनीति शुरू की। कॉलेज में रहते हुए 1987 और 1989 के बीच सरकार विरोधी आंदोलन के दौरान वह जेवीपी में शामिल हुए और तेजी से अपनी पहचान बनाई।






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