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26/11 साजिश का अहम किरदार, 16 साल बाद होगा तहव्वुर राणा के गुनाहों का हिसाब

लॉस एंजिल्स की मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर की सघन सुरक्षा के बीच एक ऐसा नाम है जो भारत में आतंकवाद के सबसे भयानक अध्याय से जुड़ा है—तहव्वुर राणा. अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने 26/11 मुंबई हमले के इस आरोपी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ कर दिया है.

 

2008 का वह काला दिन

26 नवंबर 2008 की वो काली रात, जब समुद्र के रास्ते आए 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई को दहला दिया. ओबेरॉय होटल, ताज होटल, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, लियोपोल्ड कैफे, और नरीमन हाउस—इन सभी जगहों पर बम और गोलियों की गूंज थी. 166 निर्दोष लोगों की जान लेने वाले इस हमले की साजिश के तार सिर्फ पाकिस्तान से ही नहीं, बल्कि शिकागो तक जुड़े थे.

 

कौन है तहव्वुर राणा?

 पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा, 26/11 के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली का बचपन का दोस्त है. पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर की नौकरी छोड़कर कनाडा जाने वाला राणा, हेडली के साथ मिलकर भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रचता था. शिकागो में अपनी ‘फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज’ कंपनी के जरिए उसने आतंकियों के लिए रास्ते बनाए.

 

भारत ने इस आरोपी के खिलाफ सख्त सबूत जुटाए थे. चार्जशीट में राणा पर आरोप है कि उसने न सिर्फ डेविड हेडली को मदद दी, बल्कि मुंबई हमले की हर छोटी-बड़ी योजना में उसकी अहम भूमिका थी. कहा जाता है कि जिन जगहों को 26/11 के आतंकी हमलों में निशाना बनाया गया, उनकी रेकी और प्लानिंग में राणा का सीधा हाथ था.

 

अमेरिका की अदालतों में लंबी लड़ाई

राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की मांग को लेकर भारत ने अमेरिका के साथ साझा किए गए सबूतों को अमेरिकी कोर्ट में पेश किया. राणा ने पहले अमेरिकी निचली अदालत, फिर उत्तरी सर्किट अपील कोर्ट, और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक अपने बचाव के लिए याचिकाएं दायर कीं. लेकिन 13 नवंबर को उसकी अंतिम याचिका भी खारिज कर दी गई.

 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राणा का प्रत्यर्पण अब करीब तय माना जा रहा है. भारत सरकार ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है. राणा पर भारत में 26/11 से जुड़े मुकदमों का सामना करना पड़ेगा.

 

डेविड हेडली और राणा का कनेक्शन

डेविड कोलमैन हेडली, जिसका असली नाम दाउद गिलानी है, ने तहव्वुर राणा के साथ मिलकर 26/11 की साजिश रची थी. दोनों बचपन के दोस्त थे और पाकिस्तान के हसन अब्दाल कैडेट स्कूल में साथ पढ़े थे. हेडली ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और लश्कर-ए-तैयबा के इशारे पर भारत में कई जगहों की रेकी की थी.

 

26/11: आतंक का चेहरा

26 नवंबर 2008 को, लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादी समुद्र के रास्ते मुंबई में दाखिल हुए. उनके निशाने पर भारत की वित्तीय राजधानी थी. 60 घंटे तक चली मुठभेड़ में मुंबई दहशत और खून-खराबे का गवाह बना.

 

अब, जब तहव्वुर राणा को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, सवाल यह उठता है कि क्या यह कदम 26/11 हमले के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की ओर एक ठोस कदम साबित होगा?

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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