अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने मानी सच्चाई, कहा- परमाणु ठिकाने बुरी तरह क्षतिग्रस्त

ईरान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि अमेरिका के हवाई हमलों में उसके परमाणु ठिकानों को “भारी नुकसान” पहुंचा है। ये हमले रविवार को अमेरिकी B-2 बॉम्बर्स द्वारा किए गए थे, जिनमें बंकर-भेदी बमों का इस्तेमाल किया गया। बुधवार को अल जज़ीरा से बातचीत में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, “हमारे परमाणु ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, ये तय है।” हालांकि उन्होंने नुकसान की विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया।
यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही दावा कर चुके हैं कि इन हमलों ने “ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से तबाह कर दिया” है। हालांकि, पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की एक लीक हुई प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले के बावजूद ईरान की मुख्य परमाणु क्षमताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम कुछ महीनों के लिए पीछे जरूर चला गया है, लेकिन उसका मूल ढांचा अब भी बचा हुआ है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस लीक की पुष्टि की और इसे ट्रंप की छवि खराब करने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा, “जब आप 14 बंकर-भेदी बम बिल्कुल सही निशाने पर गिराते हैं, तो परिणाम पूरी तबाही ही होता है।” इस रिपोर्ट और ट्रंप के दावे के बीच अंतर पर सवाल किए जाने पर ट्रंप ने खुफिया जानकारी को खारिज करते हुए कहा, “उन्हें असल में कुछ नहीं पता।”
फिलहाल ट्रंप एक अहम NATO समिट में भाग ले रहे हैं, जहां उन्होंने दोहराया कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा, “उन्हें बम नहीं मिलेगा, और वे संवर्धन (enrichment) नहीं करेंगे।” इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी दोहराया कि ईरान युद्धविराम का पूरी तरह से पालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक इज़राइल संघर्षविराम नहीं तोड़ेगा, तब तक ईरान भी कोई कार्रवाई नहीं करेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका की मध्यस्थता से ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष पर लागू संघर्षविराम बुधवार को 13वें दिन भी लागू रहा।





