पहलगाम में हमले के बाद फिर लौटने लगी रौनक, सैलानियों ने दिखाई हिम्मत

पांच दिन पहले हुए आतंकी हमले से हिल चुके शांत शहर पहलगाम में अब धीरे-धीरे फिर से जिंदगी सामान्य होती दिख रही है। जहां एक समय पर हजारों सैलानियों से गुलजार रहने वाला यह इलाका अचानक वीरान हो गया था, अब वहां फिर से रौनक लौटने लगी है। देश-विदेश से पर्यटक वापस आ रहे हैं और डर को पीछे छोड़ते हुए घाटी की खूबसूरती का आनंद ले रहे हैं।
रविवार को बाजारों और वादियों में घूमते सैलानियों का नजारा देखने को मिला। इस दौरान क्रोएशिया और सर्बिया से आए कुछ विदेशी पर्यटक भी नजर आए, जिनकी मौजूदगी ने हिम्मत और भरोसे का संदेश दिया।
क्रोएशिया से आईं लिजिलियाना ने कश्मीर की खूबसूरती और मेहमाननवाजी की खूब तारीफ की। वहीं, व्लात्को नामक एक अन्य क्रोएशियाई पर्यटक, जो इससे पहले दस बार कश्मीर आ चुके हैं, ने कहा, “कश्मीर दुनिया में सबसे खूबसूरत जगह है। यहां हमें कोई डर नहीं लगता। लोग बहुत प्यार और मुस्कान से मिलते हैं।”
#WATCH | J&K | Tourists continue to arrive in Pahalgam.
A tourist from Croatia says, “We have been here for 3-4 days and we are feeling very safe. Your country is very beautiful, and we have not had any problems. Kashmir is beautiful and safe… People are very kind. Everything… pic.twitter.com/rDfEPc6qhA
— ANI (@ANI) April 27, 2025
देश के अन्य हिस्सों से आए पर्यटक भी इसी जज्बे के साथ पहुंचे हैं। गुजरात के सूरत से आए मोहम्मद अनस ने कहा, “मासूमों की मौत से दिल दुखी है, लेकिन यहां के लोगों का हौसला काबिल-ए-तारीफ है। बाजार खुले हैं, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं, और स्थानीय लोग हर जगह सहयोग कर रहे हैं। हमें किसी तरह का डर नहीं है।”
#WATCH | J&K | Tourists continue to arrive in Pahalgam.
Mohammad Anas, a tourist from Gujarat’s Surat, says, “… We like it here in Kashmir. We feel sorry for our fellow tourists who lost their lives in the terrorist attack. Usual business is on here in Pahalgam. There is… pic.twitter.com/JsBDd6ZlwR
— ANI (@ANI) April 27, 2025
इसी के साथ, पहलगाम के स्थानीय लोग भी सड़कों पर तिरंगा लेकर उतरे और आतंक के खिलाफ एक शांत लेकिन मजबूत संदेश दिया।
आज घाटी शोक मना रही है, लेकिन साथ ही फिर से उठ खड़ी हो रही है — अपने लोगों की हिम्मत, पर्यटकों के समर्थन और इस विश्वास के साथ कि डर कभी उम्मीद से बड़ा नहीं हो सकता।





