तालिबान शासन के बाद पहली बार भारत आए अफगान विदेश मंत्री

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मावलवी आमिर खान मुत्ताकी गुरुवार को छह दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। तालिबान के 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका है जब किसी तालिबानी विदेश मंत्री ने भारत का दौरा किया है। इस दौरान वह भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे।
मुत्ताकी की यह यात्रा पहले पिछले महीने तय थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के चलते उन्हें दौरा रद्द करना पड़ा था। हालांकि, UNSC ने 30 सितंबर को मुत्ताकी को 9 से 16 अक्टूबर तक भारत यात्रा की अस्थायी अनुमति दी, जिसके बाद यह दौरा संभव हो सका।
अफगान विदेश मंत्री के भारत पहुंचने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उनका स्वागत किया। उन्होंने लिखा, “नई दिल्ली पहुंचने पर अफगान विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्ताकी का हार्दिक स्वागत। हम द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा की आशा कर रहे हैं।” मुत्ताकी अपने दौरे के दौरान देवबंद स्थित दारुल उलूम और आगरा के ताजमहल का भी दौरा करेंगे।
Warm welcome to Afghan Foreign Minister, Mawlawi Amir Khan Muttaqi on his arrival in New Delhi.
We look forward to engaging discussions with him on bilateral relations and regional issues. pic.twitter.com/Z4eo6dTctJ
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) October 9, 2025
यह दौरा भारत और तालिबान के बीच संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। गौरतलब है कि भारत ने अभी तक तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है और वह अफगानिस्तान में एक समावेशी और लोकतांत्रिक सरकार की वकालत करता रहा है। साथ ही भारत इस बात पर भी जोर देता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी प्रकार के आतंकवादी गतिविधियों के लिए न हो।
इससे पहले मई में एस. जयशंकर और मुत्ताकी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जो तालिबान शासन के बाद भारत और अफगानिस्तान के बीच अब तक का सबसे उच्च स्तरीय संवाद माना गया। जनवरी में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी दुबई में मुत्ताकी से मुलाकात की थी।
भारत ने अफगानिस्तान में वर्षों तक बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग दिया है। सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और संसद भवन जैसी कई परियोजनाएं भारत की मदद से पूरी हुई हैं। तालिबान सत्ता में आने के बाद शुरू में भारत ने दूरी बनाए रखी, लेकिन जून 2022 में काबुल में एक तकनीकी मिशन खोलकर संवाद की शुरुआत की गई।
तालिबान चाहता है कि भारत समेत अन्य देश उसकी सरकार को औपचारिक मान्यता दें। हालांकि, भारत इस दिशा में कोई त्वरित निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। फिर भी, भारत यह संकेत जरूर दे सकता है कि वह अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए सहयोग देने को तैयार है।





