जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, संसदीय जांच पर लगा विराम

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस फैसले के साथ ही उन पर चल रही संसदीय जांच प्रक्रिया अब खत्म हो गई है।
इस्तीफे में क्या कहा?
9 अप्रैल को लिखे अपने पत्र में जस्टिस वर्मा ने कहा कि वह बिना ज्यादा कारण बताए, भारी मन से तुरंत प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस पद पर काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही है।
अब आगे क्या होगा?
जस्टिस वर्मा के इस्तीफे के बाद Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत चल रही हटाने (इम्पीचमेंट) की प्रक्रिया अपने आप रुक गई है। नियमों के अनुसार, जैसे ही कोई जज पद छोड़ देता है, उसके खिलाफ संसद में चल रही कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकती।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला तब सामने आया था जब साल 2025 में दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद वहां से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में बिना हिसाब वाला जला हुआ कैश मिलने की बात सामने आई थी। उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में तैनात थे।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच में उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना गया। तब के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने इस मामले में आगे कार्रवाई की सिफारिश की थी।
संसद में भी शुरू हुई थी कार्रवाई
इस मामले को लेकर जुलाई 2025 में संसद के दोनों सदनों में नोटिस दिए गए थे और अगस्त में लोकसभा में प्रस्ताव भी स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी।
हालांकि, जांच प्रक्रिया के दौरान देरी भी हुई, क्योंकि एक सदस्य के रिटायर होने के बाद फरवरी में कमेटी को फिर से गठित करना पड़ा था।
अचानक खत्म हुई बड़ी जांच
जस्टिस वर्मा के इस्तीफे के साथ ही यह पूरा मामला अचानक खत्म हो गया। यह एक दुर्लभ मामला था, जिसमें किसी हाईकोर्ट के जज के खिलाफ इम्पीचमेंट की प्रक्रिया शुरू की गई थी।





