SIR विवाद पर संसद में बवाल, विपक्ष पर बरसे ओम बिरला

संसद का मानसून सत्र सोमवार को एक बार फिर भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान लोकसभा में विपक्ष का रवैया इतना आक्रामक हो गया कि अध्यक्ष ओम बिरला को सख्त लहजे में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी देते हुए साफ कहा कि अगर इस तरह का बर्ताव जारी रहा तो उन्हें “निर्णायक कार्रवाई” करनी पड़ेगी।
प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सांसद एसआईआर और अन्य मुद्दों पर नारेबाजी करते हुए वेल तक पहुंच गए। नारे और शोरगुल के बीच ओम बिरला ने कहा कि सांसदों को जनता ने प्रश्न पूछने और अपनी समस्याएं उठाने के लिए भेजा है, न कि सरकारी संपत्ति तोड़ने के लिए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा — “यदि आप उसी ताकत से सवाल पूछें, जैसे नारे लगाते हैं, तो यह देश के लोगों के लिए अधिक फायदेमंद होगा। सरकारी संपत्ति तोड़ने का विशेषाधिकार किसी को नहीं है, और अगर कोई ऐसा करता है तो मुझे सख्त कदम उठाने होंगे।”
इधर, संसद परिसर में भी विपक्षी सांसदों ने जमकर प्रदर्शन किया। बिहार में चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची संशोधन को लेकर विरोध जताने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में सांसद धरने पर बैठे। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘वोट चोरी बंद करो’ के नारे लगाए। उनके हाथों में ‘SIR को रोको’ और ‘वोट चोरी’ लिखे बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर भी थे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मानसून सत्र की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। विपक्ष के आक्रामक तेवर और अध्यक्ष की कड़ी चेतावनी के बाद अब देखना होगा कि आगे की कार्यवाही किस तरह संचालित होती है।



