सावधान! COVID में एंटीबायोटिक नहीं, WHO की सख्त चेतावनी

कोविड-19 भले ही अब महामारी नहीं रहा, लेकिन इसके अलग-अलग स्ट्रेन अब भी लोगों को संक्रमित कर रहे हैं। अमेरिका में निंबस स्ट्रेन के बाद अब ‘स्ट्रेटस स्ट्रेन’ का असर बढ़ रहा है। इसके मरीजों में गला खराब होना और आवाज बैठना जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। हालांकि ये नए स्ट्रेन जानलेवा नहीं हैं, लेकिन लोगों के मन में अब भी एक सवाल बना हुआ है – क्या कोविड-19 में एंटीबायोटिक लेनी चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी नई गाइडलाइन में साफ कहा है कि अगर किसी कोविड मरीज में बैक्टीरियल संक्रमण (bacterial infection) के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं हैं, तो उन्हें एंटीबायोटिक नहीं दी जानी चाहिए, चाहे मरीज की हालत गंभीर ही क्यों न हो। WHO की ये सलाह हाल ही में की गई कई स्टडीज़ की समीक्षा (meta-analysis) के बाद सामने आई है। रिपोर्ट में पाया गया कि जिन मरीजों को बैक्टीरिया से जुड़ा संक्रमण नहीं है, उनमें एंटीबायोटिक का कोई फायदा नहीं होता। उल्टा इससे एंटीबायोटिक दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से दुनिया भर में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (दवाओं पर असर न होना) की समस्या और बढ़ सकती है।
WHO की गाइडलाइन में कहा गया है: “हल्के लक्षणों वाले कोविड-19 मरीजों में अगर बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका कम है, तो उन्हें एंटीबायोटिक नहीं दी जानी चाहिए।” “गंभीर लक्षणों वाले कोविड-19 मरीजों में भी अगर डॉक्टरों को बैक्टीरियल इन्फेक्शन की आशंका कम लगे, तो एंटीबायोटिक न दी जाए।”
एंटीबायोटिक वो दवाएं होती हैं जो बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का इलाज करती हैं, जैसे – गले में इंफेक्शन (strep throat), यूरिन इन्फेक्शन, या कुछ प्रकार के निमोनिया। लेकिन कोविड-19 वायरस से होता है, न कि बैक्टीरिया से, इसलिए एंटीबायोटिक का इस पर कोई असर नहीं होता। अगर आप बिना ज़रूरत एंटीबायोटिक लेते हैं, तो इससे फायदा नहीं होगा बल्कि साइड इफेक्ट हो सकते हैं और आगे चलकर दवाएं बेअसर भी हो सकती हैं।
WHO की इस गाइडलाइन का मतलब है कि अब डॉक्टरों को भी कोविड-19 के इलाज में एंटीबायोटिक देने से पहले सावधानी और पुख्ता जांच करनी होगी। इससे न सिर्फ मरीजों को अनावश्यक दवाओं से बचाया जा सकेगा, बल्कि दुनिया भर में बढ़ती एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की चुनौती को भी रोका जा सकेगा।





