तट डूबे, नावें रुकीं – वाराणसी से ऋषिकेश तक बाढ़ का प्रकोप

दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार सुबह 7 बजे यमुना का पानी 204.79 मीटर तक पहुंच गया, जो कि खतरे के निशान 204.50 मीटर से ऊपर है। अधिकारियों के मुताबिक, यह जलस्तर इस मॉनसून सीजन का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। देश के कई हिस्सों में हो रही लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नदियां उफान पर हैं। प्रयागराज, वाराणसी और ऋषिकेश में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी तटों को पार करता जा रहा है। शनिवार को गंगा का जलस्तर 69.98 मीटर तक पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर है। कई दिनों से पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक हो रही भारी बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
वाराणसी के तुलसी घाट तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है और गंगा में चलने वाली सभी नावों पर रोक लगा दी गई है।
ऋषिकेश में भी भारी बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। प्रसिद्ध परमार्थ निकेतन आश्रम में गंगा का पानी आरती स्थल पर स्थित भगवान शिव की मूर्ति तक पहुंच गया है। यह नजारा लोगों में चिंता का कारण बन गया है। हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून सीजन में भारी तबाही देखने को मिली है। 20 जून से 6 अगस्त 2025 के बीच राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 199 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 108 मौतें बारिश से जुड़ी घटनाओं जैसे भूस्खलन, बादल फटना, बिजली गिरना और बाढ़ से हुई हैं। इसके अलावा 91 लोग सड़क हादसों में जान गंवा चुके हैं। राज्य को अब तक 1905.5 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
उत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई जगहों पर स्कूल बंद, यातायात ठप और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम लगातार जारी है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है और हालात पर नजर बनाए हुए है।





