नासा-इसरो का साझा मिशन ‘निसार’ लॉन्च के लिए तैयार, धरती पर रखेगा बारीक नजर

भारत और अमेरिका की स्पेस एजेंसियों – इसरो और नासा – के बीच मिलकर तैयार किया गया उपग्रह NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) आज लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है। इस मिशन को अंतरिक्ष सहयोग में दोनों देशों के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है। निसार मिशन के लॉन्च की उलटी गिनती 29 जुलाई को दोपहर 2:10 बजे से शुरू हो चुकी है। इसरो ने जानकारी दी कि मिशन को चार चरणों में पूरा किया जाएगा – लॉन्च फेज, डिप्लॉयमेंट फेज, कमीशनिंग फेज और साइंस फेज।
इसरो ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर जानकारी दी: “GSLV-F16 और NISAR के लिए आज का दिन बेहद खास है। लॉन्च का समय आ गया है। GSLV-F16 लॉन्च पैड पर खड़ा है, और NISAR पूरी तरह तैयार है। आज शाम उड़ान भरेगा।” करीब 2,393 किलोग्राम वजनी और 5 साल की उम्र वाले इस उपग्रह को GSLV-F16 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। रॉकेट की ऊंचाई करीब 51.7 मीटर है। यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित दूसरे लॉन्च पैड से शाम 5:40 बजे किया जाएगा।
GSLV-F16/NISAR
Today’s the day!
Launch Day has arrived for GSLV-F16 & NISAR. GSLV-F16 is standing tall on the pad. NISAR is ready. Liftoff today.🗓️ July 30, 2025
Live from: 17:10 Hours IST
Liftoff at : 17:40 Hours ISTLivestreaming Link: https://t.co/flWew2LhgQ
For more… pic.twitter.com/bIjVJTZyMv
— ISRO (@isro) July 30, 2025
इस मिशन का मकसद पृथ्वी के बदलावों का अध्ययन करना है। निसार खासकर जमीन और बर्फ की सतहों में हो रहे बदलावों, वनों के मौसमी बदलाव, पहाड़ों की हलचल, हिमालय और अंटार्कटिका में ग्लेशियर की गति, समुद्र के किनारे के इलाकों जैसे विषयों की लगातार निगरानी करेगा। इसरो के मुताबिक, इस उपग्रह से प्राप्त जानकारी दुनियाभर के वैज्ञानिकों के लिए बेहद फायदेमंद होगी। निसार मिशन को तैयार करने में करीब 8 से 10 साल लगे हैं। इसरो और नासा के वैज्ञानिकों ने इसमें मिलकर काम किया। उपग्रह के जटिल उपकरणों को लंबे समय तक शोध और तकनीकी विकास के बाद तैयार किया गया।
लॉन्च के बाद सबसे पहले उपग्रह की स्थिति और उपकरणों की जांच की जाएगी, जिसे ‘कमीशनिंग फेज’ कहा जाता है। इस मिशन में उपग्रह और रॉकेट की जिम्मेदारी इसरो ने ली है। वहीं, L-बैंड रडार सिस्टम, तेज डाटा ट्रांसमिशन सिस्टम, और GPS रिसीवर जैसी प्रमुख तकनीकों को नासा ने तैयार किया है। इसरो उपग्रह संचालन और कमांडिंग का जिम्मा संभालेगा, जबकि नासा ऑर्बिट मैनेजमेंट और रडार संचालन की योजना तैयार करेगा।
प्रक्षेपण के पहले 90 दिन ‘कमीशनिंग फेज’ कहलाएंगे। इसमें उपग्रह की सभी प्रणालियों की जांच की जाएगी और इसे विज्ञान संबंधी डेटा जुटाने के लिए पूरी तरह से तैयार किया जाएगा। इस दौरान इसरो और नासा की ग्राउंड स्टेशन टीमें उपग्रह से डाटा डाउनलोड करेंगी। बाद में इन आंकड़ों को प्रोसेस करके वैज्ञानिक और अन्य उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा।
निसार मिशन न केवल विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। इस मिशन के जरिए आने वाले वर्षों में पृथ्वी से जुड़े बदलावों पर वैज्ञानिकों को सटीक और लगातार जानकारी मिलती रहेगी।





