देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश बने बीआर गवई, राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ

न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने बुधवार को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समेत कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। न्यायमूर्ति गवई ने सेवानिवृत्त हुए सीजेआई संजीव खन्ना का स्थान लिया है।
बीते माह कानून मंत्रालय ने न्यायमूर्ति गवई की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी। न्यायिक परंपरा के अनुसार, वर्तमान सीजेआई सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को उत्तराधिकारी के तौर पर नामित करते हैं। जस्टिस गवई वरिष्ठता क्रम में सबसे आगे थे, इसलिए सीजेआई खन्ना ने 16 अप्रैल को केंद्र सरकार को उनके नाम की सिफारिश भेजी थी।
जस्टिस बीआर गवई ने 16 मार्च 1985 को वकालत की शुरुआत की थी। वे नागपुर और अमरावती नगर निगमों तथा अमरावती विश्वविद्यालय के स्थायी वकील रहे। 1992 से 1993 के बीच उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में कार्य किया।
17 जनवरी 2000 को वे सरकारी वकील बने और 2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए। 2005 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। 24 मई 2019 को वे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। न्यायमूर्ति गवई ने संविधान पीठों में भागीदारी की, जिनके ऐतिहासिक निर्णयों ने देश की दिशा तय की।
संविधान पीठों में रहे अहम फैसले
अनुच्छेद 370 (2023): पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया।
राजीव गांधी हत्याकांड (2022): दोषियों की रिहाई की अनुमति दी गई क्योंकि राज्यपाल ने तमिलनाडु सरकार की सिफारिश पर कोई फैसला नहीं लिया था।
वणियार आरक्षण (2022): तमिलनाडु सरकार का वणियार समुदाय को दिया गया विशेष आरक्षण सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया।
नोटबंदी (2023): जस्टिस गवई की बेंच ने 2016 की नोटबंदी को 4:1 के बहुमत से वैध ठहराया।
ईडी निदेशक कार्यकाल (2023): प्रवर्तन निदेशालय प्रमुख के कार्यकाल विस्तार को अवैध बताया गया और पद छोड़ने का आदेश दिया गया।
बुलडोजर कार्रवाई (2024): बेंच ने कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी की संपत्ति ध्वस्त करना असंवैधानिक है और जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई होगी।
जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ। उनके पिता आरएस गवई सामाजिक कार्यकर्ता और बिहार व केरल के राज्यपाल रह चुके हैं। न्यायमूर्ति गवई भारत के दूसरे अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले मुख्य न्यायाधीश बने हैं। इससे पहले जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने 2010 में यह पद संभाला था।
जस्टिस गवई का सीजेआई बनना न केवल वरिष्ठता और योग्यता की स्वीकृति है, बल्कि यह भारत की न्यायिक व्यवस्था में सामाजिक समावेशिता की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।





