वक्फ संशोधन बिल: मोदी सरकार के सभी 14 प्रस्ताव मंजूर, संसदीय समिति ने दी हरी झंडी

वक्फ संशोधन बिल: मोदी सरकार के सभी 14 प्रस्ताव मंजूर, संसदीय समिति ने दी हरी झंडी
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन बिल में शामिल सभी 14 संशोधनों को संयुक्त संसदीय समिति ने मंजूरी दे दी है। यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। समिति की बैठक में इन संशोधनों को व्यापक चर्चा के बाद स्वीकृति दी गई।
#WATCH दिल्ली: भाजपा सांसद और वक्फ(संशोधन) विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा, “… सरकार ने स्पीकर साहब से आग्रह किया था कि हम यह संशोधन वक्फ की बेहतरी और आम जनता के फायदे के लिए ला रहे हैं… JPC के सभी 44 संशोधनों पर चर्चा हुई है… सभी पक्षों… pic.twitter.com/TbQxfCzgLP
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 27, 2025
मोदी सरकार ने वक्फ अधिनियम में बदलाव के लिए 14 संशोधन प्रस्तावित किए थे, जिनका मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। इन संशोधनों में वक्फ बोर्ड के अधिकारों, संपत्ति के पंजीकरण और उपयोग को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
गौरतलब है कि समिति के समक्ष कुल 44 बदलावों के प्रस्ताव पेश किए गए थे, लेकिन 14 प्रस्तावों को ही मंजूर किया गया। BJP सांसद और JPC अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि विपक्ष के सदस्यों ने विधेयक की सभी 44 धाराओं में सैकड़ों संशोधन प्रस्तावित किए थे, लेकिन उन्हें मतदान के जरिए खारिज कर दिया गया। समिति द्वारा प्रस्तावित महत्वपूर्ण संशोधन यह है कि वर्तमान कानून में मौजूद ‘वक्फ बाय यूजर’ के आधार पर मौजूदा वक्फ संपत्तियों को चुनौती नहीं दी जा सकती, अगर इन संपत्तियों का उपयोग धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा हो।
संसदीय समिति की बैठक में हुई चर्चा
वक्फ विधेयक पर सोमवार 27 जनवरी 2025 की सुबह 11 बजे संसद की संयुक्त समिति बैठी थी। इस दौरान विधेयक पर हर क्लॉज को लेकर चर्चा की गई। JPC अध्यक्ष जगदंबिका पाल का कहना है कि समिति की ओर से अपनाए गए संशोधन कानून को अधिक बेहतर और प्रभावी बनाया जाएगा. वहीं विपक्षी सांसदों ने विधेयक को लेकर विपक्ष की कार्यवाही की निंदा की है.
विपक्ष का विरोध
बैठक के दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने संशोधनों पर आपत्ति जताई और इसे अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों के लिए खतरा बताया। विपक्ष के सांसदों ने बैठक की कार्यवाही की आलोचना की और पाल पर “लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने” का आरोप लगाया। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “यह एक दिखावटी बैठक थी। हमें सुना तक नहीं गया। पाल ने तानाशाही तरीके से काम किया है।” वहीं पाल ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक थी और बहुमत के जरिए ही फैसला लिया गया।





