“आज मैं यूक्रेन की धरती पर शांति का संदेश लेकर आया हूं…”, ज़ेलेंस्की के आधिकारिक निवास पर पीएम का स्वागत

यूक्रेन: दो दिन की पोलैंड यात्रा के बाद आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूक्रेन पहुंचें जहां उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कीव में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अपने आधिकारिक निवास, मरिंस्की पैलेस में स्वागत किया. इसी के साथ भारत ने यूक्रेन को चिकित्सा सहायता का BHISHM क्यूब सौंपा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कीव में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को सहायता सौंपी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज मैं यूक्रेन में 140 करोड़ भारतीयों की भावनाएं लेकर आया हूं, 140 करोड़ भारतीयों की भावनाएं मानवता से प्रेरित हैं, आज मैं यूक्रेन की धरती पर शांति का संदेश लेकर आया हूं…”
#WATCH कीव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज मैं यूक्रेन में 140 करोड़ भारतीयों की भावनाएं लेकर आया हूं, 140 करोड़ भारतीयों की भावनाएं मानवता से प्रेरित हैं, आज मैं यूक्रेन की धरती पर शांति का संदेश लेकर आया हूं…” pic.twitter.com/K4pY2Ek2RV
— NewsMobile Samachar (@NewsMobileHindi) August 23, 2024
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “इस दर्दनाक परिस्थिति में भी आपने(राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की) जिस गर्मजोशी से मेरा और मेरे प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया उसके लिए मैं हृदय से आपका आभार व्यक्त करता हूं. आज भारत और यूक्रेन के संबंधों के लिए बहुत ऐतिहासिक दिन है…भारत का कोई प्रधानमंत्री पहली बार यूक्रेन आया है जो अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना है…कल आपका राष्ट्रीय दिवस है और हम आपको इसके लिए बधाई देते हैं…हम (यूक्रेन में) शांति, सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जब युद्ध के शुरुआती दिन थे, तब आपने भारतीय नागरिकों और छात्रों को निकालने में मदद की थी. मैं संकट के इस समय में आपकी मदद के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूं…दुनिया अच्छी तरह जानती है कि युद्ध के दौरान हमने दो भूमिकाएं निभाई थीं…पहली भूमिका मानवीय दृष्टिकोण की थी…मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि मानवीय दृष्टिकोण से जो भी जरूरत होगी, उसके लिए भारत हमेशा आपके साथ खड़ा रहेगा और दो कदम आगे रहेगा…”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमने जो दूसरा रास्ता चुना है, वह युद्ध से दूर रहना है, हम बहुत दृढ़ता से युद्ध से दूर रहे हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम तटस्थ नहीं थे, हम पहले दिन से ही पक्षकार रहे हैं और हमारा पक्ष है शांति, हम बुद्ध की भूमि से आते हैं जहां युद्ध के लिए कोई जगह नहीं है, हम महात्मा गांधी की भूमि से आते हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को शांति का संदेश दिया.”





